भारत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक (Facial Recognition) का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे गोपनीयता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक (FRT) का व्यापक उपयोग।
- निजी ठेकेदारों और एआई-संचालित कैमरों के माध्यम से डेटा संग्रह की अनिश्चितता।
- कानूनी ढांचे और न्यायिक निरीक्षण की भारी कमी।
भारत में राजनीतिक सभाओं और विरोध प्रदर्शनों को बिना किसी ठोस कानून या न्यायिक निरीक्षण के बायोमेट्रिक निगरानी के दायरे में लाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शनों के दौरान, दिल्ली पुलिस द्वारा उन्नत तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया, जिसने नागरिक स्वतंत्रता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के अनुसार, पुलिस ने न केवल एआई-सक्षम कैमरे तैनात किए, बल्कि मोबाइल निगरानी वैन, कमांड कंट्रोल वाहन, और यहाँ तक कि चलते-फिरते व्यक्तियों की पहचान करने के लिए स्मार्ट चश्मों (Smart Spectacles) का भी उपयोग किया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई उपकरण और सेवाएं निजी ठेकेदारों द्वारा संचालित की जा रही हैं, जिनके साथ डेटा साझा करने की शर्तें स्पष्ट नहीं हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिना किसी विशिष्ट कानून के इस तरह की तकनीक का उपयोग 'चिलिंग इफेक्ट' (Chilling Effect) पैदा कर सकता है। जब नागरिकों को पता होता है कि उनकी पहचान रीयल-टाइम में ट्रैक की जा रही है, तो वे लोकतांत्रिक रूप से विरोध करने से डर सकते हैं। यह सीधे तौर पर भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त विरोध करने के अधिकार को प्रभावित करता है।
बिना किसी विधायी ढांचे के बायोमेट्रिक निगरानी का उपयोग करना व्यक्तिगत गोपनीयता और लोकतांत्रिक असहमति के बीच के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
वर्तमान में, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) की डेटा-प्रोसेसिंग बाध्यताएं अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुई हैं, और इसमें राज्य एजेंसियों को व्यापक छूट दी गई है। हालांकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का स्वचालित चेहरा पहचान प्रणाली (AFRS) अपराधियों की पहचान के लिए है, लेकिन विरोध प्रदर्शनों में इसका व्यापक उपयोग कानून के दायरे से बाहर प्रतीत होता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में निगरानी तकनीक का इतिहास पुराना है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आगमन ने इसे एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। 2022 का आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम पुलिस को विशिष्ट व्यक्तियों से रिकॉर्ड एकत्र करने की शक्ति देता है, लेकिन सामूहिक निगरानी के लिए अभी तक कोई स्पष्ट वैधानिक अनुमति नहीं है।
Frequently Asked Questions
1. क्या पुलिस के पास विरोध प्रदर्शनों में चेहरा पहचानने वाली तकनीक का उपयोग करने का कानूनी अधिकार है?
वर्तमान में, इस तकनीक के व्यापक उपयोग को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है, हालांकि पुलिस विभिन्न अधिनियमों का सहारा लेती है।
2. क्या मेरा डेटा निजी कंपनियों के पास जा सकता है?
हाँ, यदि पुलिस निजी ठेकेदारों के उपकरणों का उपयोग कर रही है, तो डेटा प्रबंधन की शर्तें अत्यंत जटिल और अस्पष्ट हो सकती हैं।