आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में जूनियर डॉक्टरों के बाद अब अनुबंध और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वेतन और नियमितीकरण की मांगों को लेकर कर्मचारियों ने ब्लैक बैज पहनने से लेकर काम बंद करने तक के चरणबद्ध विरोध की घोषणा की है।
- अनुबंध और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने सरकार की अनदेखी के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया।
- कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नियमितीकरण, पूर्ण वेतन और ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर सहायता शामिल है।
- आंदोलन के तहत ब्लैक बैज, ऑनलाइन कार्य बंदी और अंततः ड्यूटी बहिष्कार की योजना है।
आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग में एक नया संकट खड़ा हो गया है। जूनियर डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के बाद, अब अनुबंध और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 'आंध्र प्रदेश मेडिकल एंड हेल्थ कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉइज जॉइंट एक्शन कमेटी' (JAC) ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को अपने आंदोलन का पहला चरण शुरू कर दिया है।
JAC के अध्यक्ष और विशाखापत्तनम के किंग जॉर्ज अस्पताल (KGH) में कार्यरत स्टाफ नर्स जी. कोटेश्वर राव ने आरोप लगाया कि 17 जून को विजयवाड़ा में हुए बड़े विरोध प्रदर्शन के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव और स्वास्थ्य सचिव जी. वीरपंडियन से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
आंदोलन की चरणबद्ध रणनीति
कर्मचारियों ने इस विरोध को बेहद व्यवस्थित तरीके से लागू करने की योजना बनाई है। आंदोलन के विभिन्न चरणों में निम्नलिखित गतिविधियां शामिल होंगी:
- 24-27 अगस्त: ड्यूटी के दौरान ब्लैक बैज पहनना।
- 28-29 अगस्त: लंच ब्रेक के दौरान विरोध प्रदर्शन और मानव श्रृंखला बनाना।
- 30 अगस्त - 1 सितंबर: इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड और 'ABHA' पंजीकरण जैसे ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार।
- 2-3 सितंबर: DME और DSH कार्यालयों में 'पेन-डाउन' विरोध।
- 6 सितंबर से: राज्यव्यापी धरना।
- 8 सितंबर से: अंतिम चरण के रूप में ड्यूटी बहिष्कार (आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर)।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एक साथ दो अलग-अलग कैडरों (जूनियर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ) का विरोध प्रदर्शन राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को पंगु बना सकता है। यदि सरकार ने समय रहते बातचीत नहीं की, तो अस्पतालों में बुनियादी सेवाओं का अभाव हो सकता है।
सरकार की चुप्पी स्वास्थ्य कर्मियों के बीच बढ़ते असंतोष और असुरक्षा की भावना को और अधिक गहरा कर रही है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
JAC ने अपनी मांगों के चार्टर में निम्नलिखित बिंदुओं को प्रमुखता से रखा है:
| मांग का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| नियमितीकरण | अनुबंध कर्मचारियों का तत्काल स्थायीकरण |
| वेतन सुधार | नियमितीकरण तक पूर्ण सकल वेतन का भुगतान |
| मृत्यु सहायता | ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर ₹50 लाख की सहायता और परिवार के एक सदस्य को रोजगार |
| अन्य लाभ | EPF कवरेज, सवैतनिक चिकित्सा अवकाश और स्थानांतरण सुविधाएं |
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य के जूनियर डॉक्टर भी अपने स्टाइपेंड में 30% की वृद्धि की मांग को लेकर दूसरे सप्ताह के विरोध में हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच अनुबंध बनाम नियमितीकरण का मुद्दा वर्षों से बना हुआ है। सरकार अक्सर बजट की कमी का हवाला देकर स्थायी नियुक्तियों में देरी करती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों के मनोबल पर सीधा असर पड़ता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पैरामेडिकल कर्मचारी किन सेवाओं का बहिष्कार करेंगे?
उत्तर: कर्मचारी 30 अगस्त से ऑनलाइन कार्यों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड और ABHA पंजीकरण का बहिष्कार करेंगे।
प्रश्न 2: क्या आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होंगी?
उत्तर: JAC ने स्पष्ट किया है कि ड्यूटी बहिष्कार के दौरान आपातकालीन सेवाओं के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएंगे ताकि मरीजों को गंभीर नुकसान न हो।