कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की आलोचना करते हुए इसे 'आत्माहीन कॉन्फ़्रेंस सेंटर' कहा है। उन्होंने तर्क दिया कि भवन की बनावट राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतीक है और इसमें संवाद की कमी है।
- शशि थरूर ने नए संसद भवन को 'आत्माहीन' और 'कॉन्फ़्रेंस सेंटर' जैसा बताया।
- उन्होंने कहा कि भवन की बनावट में वह आत्मीयता नहीं है जो पुराने संसद में थी।
- थरूर ने लोकसभा के विस्तार (850 सदस्यों तक) पर भी कड़ी चेतावनी दी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और थिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की वास्तुकला और इसके प्रभाव पर तीखी टिप्पणी की है। पत्रकार सोभाना के. नायर की नई पुस्तक 'हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट' के विमोचन के दौरान, थरूर ने नए भवन को एक 'आत्माहीन कॉन्फ़्रेंस सेंटर' करार दिया।
थरूर का कहना है कि नए भवन की अत्यधिक ऊंची छतें और इसका 'फैन-लाइक' (पंखे जैसा) लेआउट संवाद और आपसी मेलजोल की संभावना को समाप्त कर देता है। उन्होंने कहा कि पुराने संसद कक्षों में एक प्रकार की आत्मीयता और गर्माहट थी, जो सदस्यों के बीच चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देती थी।
राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतीक
कांग्रेस सांसद ने एक गहरा विश्लेषण करते हुए कहा कि भवन में व्याप्त यह दूरी वास्तव में हमारी वर्तमान राजनीति के ध्रुवीकरण का एक रूपक (Metaphor) है। उनके अनुसार, भवन का डिज़ाइन सदस्यों के बीच की दूरी को बढ़ाता है, जो संसद की बढ़ती राजनीतिक कड़वाहट को दर्शाता है।
नए संसद भवन में वह आत्मीयता और गर्माहट नहीं है जो पुराने कक्षों में संवाद को प्रोत्साहित करती थी।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, थरूर की यह टिप्पणी केवल वास्तुकला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली में आ रहे बदलावों की ओर इशारा करती है। उन्होंने विशेष रूप से 'सेंट्रल हॉल' की अनुपस्थिति पर दुख जताया, जो पहले सांसदों, पूर्व सदस्यों और मीडिया के बीच अनौपचारिक बातचीत का मुख्य केंद्र हुआ करता था।
लोकसभा विस्तार पर चेतावनी
थरूर ने लोकसभा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 850 करने के प्रस्ताव पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि हालांकि नए भवन में भौतिक रूप से इतनी जगह है, लेकिन इतने बड़े आकार से सार्थक चर्चा और विचार-विमर्श की भावना समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इसकी तुलना चीन की संसदीय प्रणाली से करते हुए कहा कि इससे सांसद केवल 'अजनबियों का समूह' बनकर रह जाएंगे जो केवल अनुष्ठानिक रूप से तालियां बजाएंगे।
Frequently Asked Questions
1. शशि थरूर ने नए संसद भवन की आलोचना क्यों की?
थरूर का मानना है कि भवन की बनावट में संवाद के लिए आवश्यक आत्मीयता की कमी है और यह राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है।
2. लोकसभा विस्तार से क्या समस्या है?
थरूर के अनुसार, सदस्यों की संख्या बढ़ने से सार्थक संसदीय चर्चा और गहन विचार-विमर्श की गुणवत्ता गिर सकती है।