तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आधिकारिक यात्रा के विवरण और सार्वजनिक धन के खर्च को आरटीआई अधिनियम के तहत 'व्यक्तिगत जानकारी' बताकर साझा करने से इनकार करने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। इस विवाद ने संवैधानिक निकाय द्वारा सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिससे जनता के विश्वास पर असर पड़ सकता है।
- चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की यात्रा का विवरण 'व्यक्तिगत जानकारी' बताकर देने से इनकार किया।
- टीएमसी नेता साकेत गोखले ने आरटीआई आवेदन दाखिल कर सार्वजनिक धन के खर्च की जानकारी मांगी थी।
- गोखले ने सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता की कमी और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गोखले ने दावा किया है कि चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की आधिकारिक यात्राओं और उन पर खर्च किए गए सार्वजनिक धन का विवरण सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत साझा करने से इनकार कर दिया है। चुनाव आयोग ने इस जानकारी को 'व्यक्तिगत' बताते हुए देने से मना किया है, जिससे संवैधानिक निकाय की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए सिरे से सवाल उठ गए हैं।
गोखले ने बताया कि उन्होंने 18 जून, 2025 को एक आरटीआई आवेदन दायर किया था, जिसमें 19 फरवरी, 2025 को सीईसी का पदभार संभालने के बाद से ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई सभी आधिकारिक यात्राओं और उन पर सार्वजनिक धन से हुए खर्च का विवरण मांगा गया था। इस जानकारी में घरेलू और विदेशी यात्राओं की कुल संख्या, यात्रा-वार तिथियां, गंतव्य, उद्देश्य और यात्रा का तरीका, सरकारी खर्च पर सीईसी के साथ गए अधिकारी और यात्रा, आवास, दैनिक भत्ता, स्थानीय परिवहन तथा अन्य खर्चों का विस्तृत विवरण शामिल था।
आरटीआई अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में, चुनाव आयोग ने 31 जुलाई, 2025 को एक प्रति साझा की, जिसमें कहा गया था: "इन मदों के तहत मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है और इसलिए इसे आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(जे) के तहत साझा नहीं किया जा सकता है।" इस प्रतिक्रिया ने गोखले को यह सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया कि सार्वजनिक धन से किए गए आधिकारिक दौरे पर हुए खर्च को 'व्यक्तिगत जानकारी' कैसे वर्गीकृत किया जा सकता है।
गोखले ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, "सार्वजनिक धन से आधिकारिक यात्राओं पर किए गए खर्च को 'व्यक्तिगत जानकारी' कैसे कहा जा सकता है? यहां तक कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा का खर्च भी संसद में उजागर किया गया है। तो ज्ञानेश कुमार इतने खास क्यों हैं?" उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव आयोग खर्च के विवरण को छिपाकर क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है।
Why This Matters
चुनाव आयोग भारत में लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ऐसे संवैधानिक निकायों की पारदर्शिता सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक अखंडता के लिए सर्वोपरि है। जब सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित जानकारी को छिपाया जाता है, तो यह जवाबदेही की भावना को कमजोर करता है और जनता के मन में संदेह पैदा कर सकता है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश में संवैधानिक संस्थानों की स्वायत्तता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज है।
"सार्वजनिक पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित जानकारी को 'व्यक्तिगत' बताना पारदर्शिता के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है। यह लोकतांत्रिक शासन में नागरिकों के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है।"
गोखले ने आगे आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के सीईसी का पदभार संभालने के बाद से चुनाव आयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी आई है, उनका आरोप है कि आयोग "एक ब्लैक होल" बन गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरटीआई आवेदन में विशेष रूप से उन पूर्ण आधिकारिक यात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी जो पूरी तरह या आंशिक रूप से सार्वजनिक धन से वित्त पोषित थीं, न कि किसी संभावित यात्रा कार्यक्रम, वास्तविक समय की आवाजाही के विवरण, या सुरक्षा, एस्कॉर्ट या प्रोटोकॉल व्यवस्था के बारे में।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया ने सीईसी की आधिकारिक यात्रा पर हुए खर्च के बारे में गंभीर सवाल उठाए हैं और अधिक पारदर्शिता की मांग की है। गोखले ने कहा, "चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार की यात्राओं के बारे में क्या छिपाने की कोशिश कर रहा है? हमें जवाब चाहिए।" यह विवाद चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ता है।
Frequently Asked Questions
- Q1: आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) क्या है और यह क्यों लागू की गई?
A1: आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) उस जानकारी को साझा करने से छूट देती है जो किसी व्यक्ति की गोपनीयता पर अनुचित आक्रमण करती है, जब तक कि व्यापक सार्वजनिक हित में इसका खुलासा करना न्यायसंगत न हो। चुनाव आयोग ने इस मामले में इसे लागू किया है, यह तर्क देते हुए कि सीईसी की यात्रा का विवरण व्यक्तिगत जानकारी है। - Q2: इस विवाद का चुनाव आयोग की छवि पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
A2: सार्वजनिक धन के उपयोग पर पारदर्शिता की कमी के आरोप चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और निष्पक्षता की धारणा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यह जनता के विश्वास को कम कर सकता है और संवैधानिक निकायों की जवाबदेही के बारे में व्यापक बहस को बढ़ावा दे सकता है।