भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के पूर्ण गायन का सम्मान करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया है और इसे केवल दो अंतरे तक सीमित करने के कांग्रेस के फैसले की कड़ी निंदा की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस गीत के ऐतिहासिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है।

  • भाजपा ने पूरे वंदे मातरम के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रस्ताव पारित किया।
  • कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय गीत को केवल पहले दो अंतरे तक सीमित करने के 1937 के रुख को दोहराने की निंदा की गई।
  • भाजपा देश के हर कोने में वंदे मातरम के गौरवशाली इतिहास और महत्व को पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के सम्मान, गरिमा और इसके पूर्ण स्वरूप को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। भाजपा ने कांग्रेस पार्टी के उस हालिया फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें राष्ट्रीय गीत के गायन को केवल उसके पहले दो अंतरों (स्टैंजा) तक सीमित रखने की बात कही गई है। यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बहस तेज है।

भाजपा के नवनियुक्त संगठनात्मक दल की पहली बैठक के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस प्रस्ताव की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भाजपा वंदे मातरम को केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मूल मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है। नबीन ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस राष्ट्रीय गीत के महत्व को कम करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगी।

कांग्रेस के 1937 के रुख पर तीखा हमला

भाजपा का यह प्रस्ताव कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा 19 अगस्त 2026 को लिए गए उस निर्णय के विरोध में आया है, जिसमें कांग्रेस ने अपने 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरों को ही गाने की बात कही थी। भाजपा ने कांग्रेस के इस कदम को राजनीतिक तुष्टिकरण और वोट-बैंक की संकीर्ण राजनीति से प्रेरित बताया है।

नितिन नबीन ने कहा, "भाजपा राष्ट्रीय गीत को किसी भी सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टिकरण या संकीर्ण वोट-बैंक के विचारों के अधीन करने के हर प्रयास को सिरे से खारिज करती है।" उन्होंने घोषणा की कि भाजपा कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में जाकर नागरिकों को वंदे मातरम के इतिहास, इसके अर्थ और इसके गौरवशाली योगदान से अवगत कराने के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वंदे मातरम का मुद्दा केवल एक प्रतीकात्मक बहस नहीं है, बल्कि यह भारत की वैचारिक राजनीति के मूल चरित्र को दर्शाता है। जहां एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रीय गौरव और 'विकसित भारत @ 2047' के संकल्प से जोड़कर अपनी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नीति को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे ऐतिहासिक समझौतों और सर्वधर्म समभाव के चश्मे से देखती है। यह टकराव आने वाले चुनावों में ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है।

"वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक भावनात्मक और ऐतिहासिक आधार है जो आज भी इसकी राष्ट्रीय पहचान को परिभाषित करता है।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व

वंदे मातरम की रचना 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का सबसे बड़ा मंत्र बन गया था। साल 1937 में, तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके केवल पहले दो अंतरों को गाने की अनुमति दी थी, क्योंकि इसके बाद के अंतरों में मातृभूमि की तुलना हिंदू देवियों से की गई थी, जिस पर कुछ समुदायों को आपत्ति थी। भाजपा अब इसी ऐतिहासिक समझौते को तुष्टिकरण की राजनीति मानकर इसका विरोध कर रही है।

तुलना का बिंदुभाजपा का रुखकांग्रेस का रुख
गायन का दायरापूर्ण वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होना चाहिए।केवल पहले दो अंतरों (स्टैंजा) का गायन।
मूल दर्शनराष्ट्रीय चेतना और अखंड देशभक्ति का प्रतीक।1937 के ऐतिहासिक समझौते और सर्वधर्म समभाव का पालन।
रणनीतिदेशव्यापी जागरूकता अभियान और राष्ट्रवाद का प्रसार।आधिकारिक कार्यक्रमों में सीमित गायन की परंपरा को बनाए रखना।
क्या आप जानते हैं?: रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार 1896 में कलकत्ता में आयोजित कांग्रेस के राजनीतिक मंच पर वंदे मातरम को स्वरबद्ध कर गाया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कांग्रेस वंदे मातरम के केवल दो अंतरों को ही क्यों गाना चाहती है?
उत्तर: कांग्रेस 1937 के अपने कार्यसमिति के प्रस्ताव का हवाला देती है, जिसमें विभिन्न समुदायों की धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केवल पहले दो अंतरों को गाने की सहमति बनी थी।

प्रश्न 2: भाजपा का राष्ट्रव्यापी अभियान क्या है?
उत्तर: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य देश के हर नागरिक तक वंदे मातरम के संपूर्ण इतिहास, उसके अर्थ और स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान की जानकारी पहुंचाना है।