कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी आवेदन जमा किए जा रहे हैं। किच्छा विधानसभा क्षेत्र में एक ही व्यक्ति द्वारा 6,410 आपत्तियां दर्ज करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

  • कांग्रेस ने चुनाव आयोग को सौंपे ज्ञापन में उत्तराखंड में मतदाता सूची से नाम हटाने की 'बल्क' प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं।
  • किच्छा विधानसभा क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अकेले 6,410 आपत्तियां (Form 7) दर्ज कराई हैं।
  • कांग्रेस का आरोप है कि कुछ संगठनों को ऑनलाइन आवेदन करने के लिए 'संस्थागत पहुंच' प्राप्त है।
  • चुनाव आयोग ने कहा है कि 5 से अधिक आपत्तियों पर अनिवार्य समीक्षा की जाएगी।

नई दिल्ली/देहरादून: कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग बिना सत्यापन के उन बल्क आवेदनों को स्वीकार कर रहा है, जिनका उद्देश्य मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाना है।

कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को एक ज्ञापन सौंपा और इसके बाद देहरादून में उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि 'फॉर्म 7' (नाम हटाने हेतु आवेदन) का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो आमतौर पर मृत्यु या प्रवास के मामलों में भरा जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि मतदाता सूची में इस तरह की बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ होती है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित कर सकती है। मतदाता सूची की शुद्धता ही निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है।

मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया यदि बिना उचित जांच के की जाती है, तो यह चुनावी लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।

कांग्रेस के आंकड़ों के अनुसार, किच्छा विधानसभा क्षेत्र में राजेश तिवारी नामक एक व्यक्ति ने लगभग 6,410 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इसके अलावा, 262 ऐसे व्यक्ति पाए गए हैं जिन्होंने 10 से अधिक 'फॉर्म 7' जमा किए हैं। कांग्रेस विधायक काजी मोहम्मद निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन माध्यम से इतने अधिक आवेदन दर्ज करना यह दर्शाता है कि कुछ विशेष समूहों को सिस्टम तक 'संस्थागत पहुंच' प्राप्त है।

ऐसी घटनाएं केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं हैं; इससे पहले राजस्थान, गुजरात और असम में भी इसी तरह की शिकायतों के मामले सामने आए थे, जहां मतदाताओं ने दावा किया था कि उनके नाम हटाने के लिए आवेदन उन्होंने स्वयं नहीं किए थे।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अधिक विस्तृत होता है। इसमें पुराने रिकॉर्ड्स (जैसे 2003 के रोल) का मिलान किया जाता है ताकि फर्जी मतदाताओं को हटाया जा सके। हालांकि, हाल के वर्षों में तकनीक के बढ़ते उपयोग ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा हेरफेर की नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

Did You Know?: 'फॉर्म 7' का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम पर आपत्ति करने या उसे हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. फॉर्म 7 क्या है?
यह एक आधिकारिक दस्तावेज है जिसका उपयोग मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को हटाने या उसमें सुधार करने के लिए आपत्ति दर्ज करने हेतु किया जाता है।

2. चुनाव आयोग ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि वे बल्क फॉर्म जमा करने के सभी आरोपों की जांच करेंगे।