केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) का पक्ष लेने और नियमों के उल्लंघन में टोल वसूलने का आरोप लगाया है। उन्होंने किसानों के मुआवजे और निजी कंपनियों को मिल रहे अनुचित लाभ पर सवाल उठाए हैं।
- एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि NICE ने फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन करते हुए ₹2,000 करोड़ से अधिक का टोल वसूला है।
- मंत्री ने कहा कि सरकार निजी कंपनी के प्रति अत्यधिक नरम है और अधिकारी उनके पक्ष में निर्णय ले रहे हैं।
- किसानों ने परियोजना के लिए भूमि देने के 20 साल बाद भी उचित मुआवजा नहीं पाया है।
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक की वर्तमान राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) के प्रवर्तकों के साथ हाथ मिला लिया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने फ्रेमवर्क समझौते का उल्लंघन करते हुए कंपनी को टोल वसूलने की अनुमति दी है, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
हसन जिले के होलेनासरपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कुमारस्वामी ने खुलासा किया कि समझौते के तहत NICE को मोटर चालकों से टोल वसूलने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद, कंपनी ने अब तक ₹2,000 करोड़ से अधिक की राशि वसूल ली है। उन्होंने इसे जनता के साथ एक बड़ा धोखा करार दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
NICE परियोजना की जड़ें काफी पुरानी हैं। कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवे गौड़ा की महत्वाकांक्षी परियोजना थी, लेकिन इसका समझौता उनके मुख्यमंत्री के रूप में 18 महीने के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षरित किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले कई दशकों से विभिन्न सरकारों ने इस निजी कंपनी को बिना किसी नियंत्रण के मुनाफा कमाने की छूट दी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल एक टोल विवाद नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि निजी कंपनियां सरकारी समझौतों से ऊपर उठकर काम करती हैं, तो यह कानून के शासन के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश करता है।
सरकार निजी कंपनियों के प्रति अत्यधिक झुक गई है, जिससे किसानों के हितों और सार्वजनिक धन की अनदेखी हो रही है।
कुमारस्वामी ने किसानों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने इस परियोजना के लिए अपनी उपजाऊ भूमि दी थी, उन्हें 20 साल बीत जाने के बाद भी उचित मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि अधिकारी निजी कंपनी के हितों की रक्षा करने के लिए निर्णय ले रहे हैं।
इसके अलावा, उन्होंने बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति के गठन के पीछे के तर्क पर प्रश्न चिह्न लगाया और कहा कि एक राजनीतिक नेता के रूप में, वह किसानों की जमीन छीनने के प्रयासों के खिलाफ चुप नहीं रह सकते।
Frequently Asked Questions
1. एचडी कुमारस्वामी का मुख्य आरोप क्या है?
कुमारस्वामी का आरोप है कि सरकार NICE कंपनी को अनुचित लाभ दे रही है और कंपनी ने समझौते का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से टोल वसूला है।
2. किसानों की मुख्य समस्या क्या है?
किसान पिछले 20 वर्षों से अपनी जमीन के बदले उचित मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।