कर्नाटक में विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में 16.38 लाख मृत मतदाताओं के नाम पाए गए हैं, जो राज्य की औसत वार्षिक मृत्यु दर से चार गुना अधिक है। यह खुलासा चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- कर्नाटक की मतदाता सूची में 16.38 लाख मतदाताओं को 'मृत' के रूप में चिह्नित किया गया है।
- यह संख्या राज्य में होने वाली औसत वार्षिक मौतों (4.26 लाख) से लगभग चार गुना अधिक है।
- इस विसंगति से पिछले चुनावों की निष्पक्षता और मतदाता सूची के रख-रखाव पर सवाल उठ रहे हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक में हाल ही में किए गए विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) के आंकड़ों ने चुनावी प्रशासन में एक बड़ी खामी को उजागर कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, 17 अगस्त तक पहचाने गए 1.08 करोड़ से अधिक 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट, मृत और अन्य' (ASDDO) श्रेणियों के मतदाताओं में से 16.38 लाख को 'मृत' के रूप में चिह्नित किया गया है।
यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि यह कर्नाटक में होने वाली औसत वार्षिक मौतों की संख्या से लगभग चार गुना अधिक है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के आंकड़ों के आधार पर, 2002 से 2024 के बीच कर्नाटक में वार्षिक औसत मृत्यु दर लगभग 4.26 लाख रही है। यहाँ तक कि 2021 के कोविड महामारी काल के दौरान भी, जो कि मृत्यु दर का उच्चतम स्तर था, यह संख्या केवल 5.2 लाख थी।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर मृत लोगों के नाम बने रहना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह चुनावी अखंडता के लिए एक गंभीर खतरा है। यदि इतने अधिक मृत लोग सूची में थे, तो प्रश्न यह उठता है कि पिछले कई चुनावों में इन नामों का उपयोग कैसे किया गया होगा और क्या इससे परिणामों को प्रभावित करने की संभावना थी?
इतनी बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं का मतदाता सूची में बने रहना चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने दावा किया है कि मतदाता सूची का 100% डिजिटलीकरण हो चुका है। इसके बावजूद, 5 अगस्त को 'मृत' श्रेणी में 16.3 लाख नाम थे, जो 17 अगस्त तक बढ़कर 16.38 लाख हो गए। यह वृद्धि दर्शाती है कि डिजिटलीकरण के बाद भी डेटा की पहचान और मिलान प्रक्रिया में विसंगतियां मौजूद हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और अन्य राज्य
मतदाता सूची में गलतियों का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले बिहार में भी 'विशेष गहन संशोधन' के दौरान कई जीवित मतदाताओं को गलती से 'मृत' घोषित कर दिया गया था। इस मामले को लेकर योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वयं ऐसे मतदाताओं से मुलाकात कर इस विसंगति को उजागर किया था।
क्या आप जानते हैं?: मतदाता सूची में 'ASDDO' का अर्थ है - Absent (अनुपस्थित), Shifted (स्थानांतरित), Duplicate (डुप्लिकेट), Dead (मृत), और Other (अन्य)।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या ये सभी 16.38 लाख लोग एक ही साल में मरे हैं?
नहीं, यह आंकड़ा विभिन्न वर्षों के दौरान मृत हुए लोगों का संचयी (cumulative) योग है जो सूची से हटाए नहीं गए थे।
2. निर्वाचन अधिकारी ने इस पर क्या कहा?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक मामले की पुष्टि मृत्यु प्रमाण पत्र या स्थानीय जांच (spot mahazar) के माध्यम से की जा रही है।