मदुरई स्थित मानवाधिकार संगठन 'पीपल्स वॉच' ने तमिलनाडु में हिरासत में प्रताड़ना और मौतों के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने वर्तमान सरकार और राज्य मानवाधिकार आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
- तमिलनाडु में सरकार के कार्यभार संभालने के पहले 100 दिनों में 8 हिरासत में मौत के मामले सामने आए।
- जुलाई महीने में ही तीन अलग-अलग घटनाओं की रिपोर्ट दी गई है।
- राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) में महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं।
- पीपल्स वॉच ने विधायकों से पुलिस बजट पर चर्चा के दौरान इस मुद्दे को उठाने की अपील की है।
मदुरै स्थित प्रमुख मानवाधिकार संगठन, पीपल्स वॉच ने तमिलनाडु में हिरासत में प्रताड़ना (custodial torture) और हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में अचानक हुई वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के कार्यकारी निदेशक हेन्री तिफने ने वर्तमान प्रशासन के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता संभालने के मात्र 100 दिनों के भीतर तमिलनाडु में आठ हिरासत में मौत के मामले दर्ज किए गए हैं। विशेष रूप से, जुलाई महीने में ही तीन ऐसी दुखद घटनाएं सामने आईं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब राज्य के महत्वपूर्ण निगरानी निकाय जैसे कि राज्य और जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण और पुलिस शिकायत प्राधिकरण मौन रहते हैं, तो यह नागरिक अधिकारों के लिए एक खतरनाक संकेत है। मानवाधिकारों के उल्लंघन की ये घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती हैं।
यह स्थिति हमारे समाज के लिए अत्यंत खतरनाक है क्योंकि निगरानी तंत्र पूरी तरह से निष्क्रिय प्रतीत हो रहा है।
चिंता का एक और बड़ा कारण तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) की निष्क्रियता है। रिपोर्ट के अनुसार, नई सरकार के आने के बाद से आयोग ने हाल के किसी भी मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) नहीं लिया है। इसके अलावा, आयोग में दो सदस्यों के पद और अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष का पद भी लंबे समय से रिक्त है, जिससे संस्थागत निगरानी कमजोर हो गई है।
हेन्री तिफने ने राजनीतिक नेतृत्व की विडंबना की ओर भी इशारा किया। उन्होंने याद दिलाया कि टीवीके नेता सी. जोसेफ विजय ने पिछले वर्ष पुलिस हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद हिरासत में होने वाली मौतों में वृद्धि देखी गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पीपल्स वॉच ने विधायकों से क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने मांग की है कि 3 सितंबर को जब पुलिस अनुदान (grants) पर चर्चा हो, तो विधायक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं।
प्रश्न 2: मानवाधिकार आयोग की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: आयोग में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं और यह हालिया मामलों पर सक्रिय रूप से कार्रवाई नहीं कर रहा है।