इंडिया टुडे विमेंस समिट 2026 में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राजनीति में महिलाओं की कम भागीदारी और राजनीतिक दलों की पितृसत्तात्मक मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने महिला आरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार के प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की।

  • भारत में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी मात्र 13.6% है, जो वैश्विक औसत 27.4% से काफी कम है।
  • राजनीतिक दल महिला उम्मीदवारों को टिकट देने में संकोच करते हैं, विशेषकर यदि उनका राजनीतिक पृष्ठभूमि न हो।
  • सरकार 'लखपति दीदी' और 'मुद्रा लोन' जैसे माध्यमों से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इंडिया टुडे विमेंस समिट 2026 के दौरान, केंद्रीय राज्य मंत्री और अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने भारत में महिलाओं के सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों पर एक अत्यंत प्रभावशाली भाषण दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे 'चिंता' के नाम पर महिलाओं पर नियंत्रण करने की कोशिश की जाती है और राजनीति में उन्हें व्यवस्थित रूप से हाशिए पर रखा जाता है।

पटेल ने एक चौंकाने वाला सांख्यिकीय अंतर प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की उपस्थिति केवल 13.6% है, जबकि वैश्विक औसत 27.4% है। इस अंतर का मुख्य कारण राजनीतिक दलों की वह मानसिकता है, जहाँ वे महिला उम्मीदवारों को टिकट देने में अत्यधिक अनिच्छा दिखाते हैं, विशेषकर उन महिलाओं को जिनका कोई पुराना राजनीतिक पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं है।

राजनीतिक बाधाएं और आरक्षण का मुद्दा

महिला आरक्षण विधेयक (Women's Reservation Bill) पर चर्चा करते हुए, पटेल ने पुरुष सांसदों की उन चिंताओं का भी उल्लेख किया जो अपने निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के नुकसान को लेकर व्यक्त करते हैं। उन्होंने एक महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तावित किया: संसद की कुल सीटों का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि आरक्षण के साथ-साथ बढ़ते मतदाता आधार को भी समायोजित किया जा सके।

राजनीतिक दलों को केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से महिला नेतृत्व तैयार करना होगा।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पटेल का तर्क केवल प्रतिनिधित्व के बारे में नहीं है, बल्कि यह सत्ता संरचना में बदलाव लाने के बारे में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक राजनीतिक दल आंतरिक रूप से बदलाव नहीं लाते, तब तक केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा।

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम

पटेल ने सरकार की उन पहलों का भी विवरण दिया जो महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। उन्होंने जन धन योजना, लखपति दीदी योजना और मुद्रा लोन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य 'महिलाओं द्वारा संचालित विकास' (Women-led development) सुनिश्चित करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा दशकों पुराना है। 1992 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगर निकायों में आरक्षण तो दिया गया, लेकिन संसद और विधानसभाओं में यह लंबे समय तक लंबित रहा। अब महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने के बाद, क्रियान्वयन की प्रक्रिया सबसे बड़ी चुनौती है।

Did You Know?: भारत में पंचायतों के माध्यम से लाखों महिला नेता जमीनी स्तर पर लोकतंत्र का संचालन कर रही हैं, जो संसद में उनके प्रवेश के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

Frequently Asked Questions

1. भारत में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिशत कितना है?
वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 13.6% है।

2. अनुप्रिया पटेल की पार्टी में महिलाओं के लिए क्या कोटा है?
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि उनके दल, अपना दल (सोनेलाल) में महिला उम्मीदवारों के लिए 33 प्रतिशत का आंतरिक कोटा है।