तिरुचि नगर निगम ने शहर के 212 बड़े कचरा उत्पादकों (BWGs) को निर्देश दिया है कि वे कचरे का पृथक्करण और प्रसंस्करण अपने परिसर में ही करें। इस कदम का उद्देश्य शहरी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना है।

  • शहर में 212 बड़े कचरा उत्पादकों (BWGs) की पहचान की गई है।
  • कचरे को चार श्रेणियों: गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल में बांटना अनिवार्य है।
  • बड़े प्रतिष्ठानों को अब कचरा उठाने वालों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं प्रसंस्करण करना होगा।

तिरुलि नगर निगम ने शहर के बड़े कचरा उत्पादकों (Bulk Waste Generators - BWGs) को अपनी अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी संरचना को मजबूत करने और अपने परिसर में उत्पन्न होने वाले कचरे का स्वयं प्रसंस्करण करने का सख्त निर्देश दिया है। अब इन बड़े संस्थानों को कचरा स्वच्छता कर्मचारियों को सौंपने के बजाय, अपने स्तर पर ही कचरे का निपटान सुनिश्चित करना होगा।

कौन हैं 'बड़े कचरा उत्पादक'?

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, उन प्रतिष्ठानों को BWG की श्रेणी में रखा गया है जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करते हैं:

  • 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक का निर्मित क्षेत्र।
  • प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत।
  • प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करना।

इस श्रेणी में होटल, अस्पताल, आईटी पार्क, शैक्षणिक संस्थान, विवाह हॉल, वाणिज्यिक परिसर और आवासीय कल्याण संघ (RWAs) शामिल हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरा प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बन गया है। वर्तमान में, निगम केवल गीले कचरे को इकट्ठा करता है और उसे माइक्रो कंपोस्ट केंद्रों पर संसाधित करता है, जबकि सूखा कचरा अक्सर स्क्रैप डीलरों को दे दिया जाता है। नया नियम इस चक्र को अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण करना लैंडफिल के बोझ को कम करने का एकमात्र स्थायी समाधान है।

निगम ने अब अनिवार्य कर दिया है कि सभी BWGs को चार अलग-अलग रंगों के डिब्बे रखने होंगे ताकि गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग-अलग किया जा सके।

ऐतिहासिक संदर्भ और पायलट प्रोजेक्ट

वर्ष 2024 में, निगम ने श्रीरंगम, वोरैयाुर और पलक्कराई जैसे क्षेत्रों में पायलट आधार पर कंपोस्ट बिन पेश किए थे। इन बिनों में सूक्ष्मजीवी कोको पीट (microbial coco peat) का उपयोग किया जाता है, जिससे लगभग 40 दिनों में कचरे को खाद में बदल दिया जाता है। हालांकि प्रायोजकों की कमी के कारण इसे बड़े पैमाने पर नहीं बढ़ाया जा सका, लेकिन अब निगम का लक्ष्य BWGs को इसी तरह की प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

Did You Know?: सूक्ष्मजीवी कोको पीट का उपयोग करने से जैविक कचरे के अपघटन की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे मात्र 40 दिनों में उच्च गुणवत्ता वाली खाद प्राप्त होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: BWG के लिए कचरे को कितने भागों में बांटना जरूरी है?

उत्तर: BWG को कचरे को चार श्रेणियों में बांटना अनिवार्य है: गीला, सूखा, स्वच्छता और विशेष देखभाल वाला कचरा।

प्रश्न 2: क्या यह नियम केवल व्यावसायिक संस्थानों पर लागू होता है?

उत्तर: नहीं, इसमें बड़े आवासीय परिसर (RWAs) और बड़ी पानी की खपत वाले संस्थान भी शामिल हैं।