तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मनिक्कम टैगोर ने जन धन खातों से निकासी पर लगने वाले नए शुल्कों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे गरीबों पर अतिरिक्त बोझ बताया है।
- बैंक महीने में चार से अधिक बार निकासी पर ₹15 + 18% GST शुल्क लगा सकते हैं।
- SBI ने ₹17.70 प्रति लेनदेन शुल्क की घोषणा की है, जो 1 अक्टूबर से लागू होगा।
- मनिक्कम टैगोर ने इसे गरीबों के खिलाफ और बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने वाला कदम बताया है।
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष बी. मनिक्कम टैगोर ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी बचत खातों (जन धन खातों) से निकासी पर शुल्क लगाकर गरीब और आम बैंक खाताधारकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की योजना बना रही है। उन्होंने इस प्रस्तावित शुल्क को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
टैगोर द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैंकों ने निर्णय लिया है कि यदि कोई व्यक्ति महीने में चार से अधिक बार अपने बुनियादी बचत खाते से निकासी (ATM सहित) करता है, तो उस पर ₹15 का जुर्माना और उस पर 18% GST लगाया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने घोषणा की है कि यह शुल्क प्रति लेनदेन ₹17.70 होगा और इसे 1 अक्टूबर से लागू किया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम भारत के वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के प्रयासों पर सवाल खड़ा करता है। जन धन योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के सबसे निचले स्तर के लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। यदि निकासी पर शुल्क लगाया जाता है, तो यह उन लोगों को बैंकिंग से दूर कर सकता है जो अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बार-बार नकदी निकालते हैं।
यह नीतिगत बदलाव डिजिटल इंडिया के विजन के विपरीत है और अनजाने में लोगों को फिर से नकद लेनदेन की ओर धकेल सकता है।
मनिक्कम टैगोर ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि बुनियादी बैंकिंग खाते 2005 में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 'नो फ्रिल्स अकाउंट' पहल के तहत शुरू किए गए थे, जिसे बाद में भाजपा सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन धन योजना के रूप में पुनर्गठित किया गया। उन्होंने दावा किया कि लगभग 56 करोड़ खातों में से लगभग 53 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के माध्यम से खोले गए हैं।
कांग्रेस सांसद ने सरकार के डिजिटल भुगतान दृष्टिकोण की भी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि इंटरनेट और बिजली की विश्वसनीय पहुंच की कमी वाले लोगों के लिए ये शुल्क बाधा बनेंगे। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन पर जोर देने के बावजूद, नकद परिसंचरण (Cash Circulation) जनवरी 2017 के ₹9 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹43 लाख करोड़ हो गया है।
बड़े कॉरपोरेट्स बनाम गरीब नागरिक
टैगोर ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले एक दशक में बैंकों ने बड़े व्यावसायिक समूहों के लिए ₹16 लाख करोड़ के ऋण माफ किए हैं, जबकि अब वे गरीब खाताधारकों से मामूली निकासी पर शुल्क वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। यह विरोधाभास सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
Frequently Asked Questions
1. नया शुल्क कब से लागू हो सकता है?
SBI के अनुसार, यह शुल्क 1 अक्टूबर से प्रभावी हो सकता है।
2. शुल्क किस पर लगेगा?
महीने में चार बार से अधिक निकासी करने पर ₹15 + GST का शुल्क लगेगा।