कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'वन्दे मातरम्' के गायन को लेकर भाजपा द्वारा उठाए गए सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने पीएम मोदी से पूछा कि इतने वर्षों तक उन्होंने पूरा गीत क्यों नहीं गाया।

  • कांग्रेस ने 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव को दोहराया है जिसमें 'वन्दे मातरम्' के केवल दो छंदों को गाने का निर्णय लिया गया था।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने और जनता को बांटने का आरोप लगाया।
  • खड़गे ने कहा कि कोई भी धार्मिक अनुष्ठान उनकी विचारधारा या अंबेडकरवादी मूल्यों को नहीं बदल सकता।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'वन्दे मातरम्' के गायन को लेकर छिड़े विवाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। कलबुरागी में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए, खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया कि यदि पूरा गीत गाना इतना ही महत्वपूर्ण था, तो पिछले कई वर्षों में उन्होंने और अन्य भाजपा मुख्यमंत्री ने इसे पूरा क्यों नहीं गाया?

यह विवाद तब गहराया जब भाजपा ने कांग्रेस कार्य समिति के उस निर्णय की निंदा की, जिसमें 1937 के अपने पुराने प्रस्ताव को फिर से अपनाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस कार्यक्रमों में 'वन्दे मातरम्' के केवल पहले दो छंदों को गाने का नियम है। खड़गे ने तर्क दिया कि यह निर्णय महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान नेताओं की सहमति से लिया गया था और पिछले 90 वर्षों से इसका पालन किया जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक गीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग और राजनीतिक पहचान के इर्द-गिर्द घूम रहा है। भाजपा इसे 'राष्ट्रवाद' से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस इसे चुनावी लाभ के लिए 'ध्रुवीकरण की चाल' बता रही है।

खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को देशभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया है।

खड़गे ने भाजपा पर 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का उपयोग करके बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह से युवाओं और विचारकों को प्रताड़ित किया गया, तो इसका परिणाम देश के भीतर प्रतिकूल होगा। इसके साथ ही उन्होंने हल्द्वानी में हुए कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने केवल प्रचार और वोटों के ध्रुवीकरण का जरिया बताया।

खड़गे ने भाजपा की तुलना मुस्लिम लीग से करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी 'जनसंघ' ने भी अतीत में अलग-अलग गठबंधन किए थे। उन्होंने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा बी.आर. अंबेडकर के समानता के विचार, जवाहरलाल नेहरू के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है।

Did You Know?: 'वन्दे मातरम्' को 1937 में कांग्रेस द्वारा केवल दो छंदों तक सीमित करने का निर्णय ऐतिहासिक रूप से मान्य था ताकि विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य बना रहे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कांग्रेस 'वन्दे मातरम्' के केवल दो छंद क्यों गाती है?
उत्तर: यह 1937 के कांग्रेस कार्य समिति के प्रस्ताव पर आधारित है, जिसे देश के महान नेताओं की सहमति से लिया गया था।

प्रश्न 2: खड़गे ने भाजपा पर क्या आरोप लगाया?
उत्तर: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोटों के लिए ध्रुवीकरण कर रही है और बुद्धिजीवियों को 'दिमागी नक्सल' कह रही है।