पुणे के दौंड तालुका के कांगगांव में एक किसान आठ दिनों से भूख हड़ताल पर है, जिसने सरकार से बिना शर्त ऋण माफी और प्रदूषण फैलाने वाली सीमेंट कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की है।
- पुणे के कांगगांव में 49 वर्षीय किसान का 8वें दिन भी अनशन जारी।
- बिना शर्त पूर्ण ऋण माफी और ₹2 लाख की सहायता राशि की मांग।
- सीमेंट कंपनियों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और बिना NOC के संचालन का आरोप।
- CIBIL स्कोर की अनिवार्यता हटाने और पानी की योजनाओं को शुरू करने की मांग।
महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड तालुका के कांगगांव गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक 49 वर्षीय किसान पिछले आठ दिनों से अनशन पर बैठा है, जो राज्य सरकार की नीतियों और स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहा है। किसान की मांगें केवल आर्थिक राहत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें जीवन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण संरक्षण को भी शामिल किया गया है।
प्रमुख मांगें और आर्थिक संकट
रयत क्रांति संगठन के प्रवक्ता भानुदास शिंदे ने स्पष्ट किया है कि यह अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी 10 मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती। शिंदे का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित ऋण माफी योजना में इतनी शर्तें जुड़ी हैं कि वह किसानों की आत्महत्या रोकने में विफल रही है। उन्होंने मांग की है कि सरकार बिना किसी शर्त के पूर्ण ऋण माफी प्रदान करे और जिन किसानों पर बकाया है, उन्हें ₹2 लाख की सहायता राशि दी जाए।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने आर्थिक मंदी को देखते हुए एक वर्ष के लिए सभी अनिवार्य ऋण वसूली को रोकने और ऋण प्रक्रियाओं से CIBIL स्कोर की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है।
पर्यावरण और स्थानीय मुद्दे
कांगगांव के ग्रामीणों के लिए प्रदूषण एक गंभीर संकट बन गया है। शिंदे ने आरोप लगाया कि गांव में स्थित दो सीमेंट कंपनियां भारी प्रदूषण फैला रही हैं और बिना ग्राम पंचायत की एनओसी (NOC) के काम कर रही हैं। भारी वाहनों के आवागमन से न केवल सड़कें खराब हो रही हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
"सरकार की ऋण माफी योजना शर्तों के बोझ तले दबी है, जो वास्तव में किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें और अधिक संकट में डाल रही है।"
सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी मांगें
संगठन ने कुछ क्रांतिकारी सामाजिक सुधारों की भी मांग की है। इनमें बीमार मरीजों के अस्पताल बिलों का सरकारी भुगतान, उजनी बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई अनुपयोगी भूमि को मूल मालिकों को वापस करना, और मराठा समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराना शामिल है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आंदोलन केवल एक किसान का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र के कृषि संकट और औद्योगिक विकास के बीच बढ़ते संघर्ष का प्रतीक है। यदि सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो यह ग्रामीण असंतोष को और गहरा कर सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किसान की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: मुख्य मांग बिना किसी शर्त के पूर्ण ऋण माफी और प्रदूषण फैलाने वाली सीमेंट कंपनियों पर कार्रवाई करना है।
प्रश्न 2: रयत क्रांति संगठन ने मुख्यमंत्री को क्या लिखा है?
उत्तर: संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कृषि संकट और स्थानीय प्रदूषण के मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।