केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने खुलासा किया है कि 2006-07 में मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे विधानसभा में पर्याप्त समर्थन न होने के कारण NICE प्रोजेक्ट को रद्द नहीं कर सके थे। उन्होंने वर्तमान सरकार और पिछले शासनों पर इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार और किसानों के शोषण का आरोप लगाया है।

  • एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि 2006 में उनके पास केवल 38 विधायकों का समर्थन था।
  • उन्होंने NICE प्रोजेक्ट को कर्नाटक का 'सबसे बड़ा घोटाला' करार दिया।
  • कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन का उपयोग रियल एस्टेट विकास के लिए किया गया।
  • उन्होंने वर्तमान सरकार पर कंपनी के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए NICE (Nandi Infrastructure Corridor Enterprise) प्रोजेक्ट पर अपना रुख स्पष्ट किया। मेलुकोटे के श्री चेलुवनारायण स्वामी मंदिर में प्रार्थना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने खुलासा किया कि जब वे 2006-07 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब वे इस विवादित प्रोजेक्ट को रद्द करने में असमर्थ थे।

कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उस समय उनके पास विधानसभा में केवल 38 विधायकों का समर्थन था। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था, लेकिन उन्हें अनुकूल प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब उन्होंने कैबिनेट के सामने यह मुद्दा उठाने की कोशिश की, तो उनके गठबंधन सहयोगियों ने कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर दिया था।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि NICE प्रोजेक्ट दशकों से कर्नाटक की राजनीति का एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा रहा है। कुमारस्वामी का यह बयान न केवल उनके अपने कार्यकाल की सीमाओं को रेखांकित करता है, बल्कि वर्तमान कांग्रेस सरकार की शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता पर भी सवाल उठाता है। यदि उनके पास आज की तरह 134 विधायकों का बहुमत होता, तो वे दोषियों को जेल भेज सकते थे, जैसा कि उन्होंने दावा किया।

NICE प्रोजेक्ट केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह भूमि अधिग्रहण और कॉर्पोरेट हितों के बीच के संघर्ष का एक प्रतीक बन गया है।

कुमारस्वामी ने NICE को कर्नाटक के "सबसे बड़े घोटालों" में से एक बताते हुए आरोप लगाया कि फ्रेमवर्क समझौते का बार-बार उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रमोटरों के लिए रेड कारपेट बिछाया गया, जबकि किसानों की उपजाऊ भूमि का शोषण किया गया। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि 20 साल बाद भी किसानों को उनके उचित मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि किसानों से ली गई जमीन का उपयोग बाद में वाणिज्यिक रियल एस्टेट विकास के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि अदालत ने पहले ही टिप्पणी की है कि टोल संग्रह अवैध है, फिर भी सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

NICE प्रोजेक्ट की शुरुआत दशकों पहले कर्नाटक में एक महत्वाकांक्षी कॉरिडोर के रूप में हुई थी। हालांकि, समय के साथ यह भूमि अधिग्रहण विवादों, कानूनी लड़ाइयों और टोल वसूली की अनियमितताओं के कारण विवादों के घेरे में आ गया। यह प्रोजेक्ट अक्सर सरकार और निजी संस्थाओं के बीच के जटिल संबंधों के कारण चर्चा में रहता है।

Did You Know?: NICE प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर कर्नाटक में कई दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: एचडी कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट को रद्द न कर पाने का क्या कारण बताया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि 2006-07 में मुख्यमंत्री के रूप में उनके पास विधानसभा में पर्याप्त समर्थन (केवल 38 विधायक) नहीं था।

प्रश्न 2: कुमारस्वामी ने किसानों के संबंध में क्या आरोप लगाए?
उत्तर: उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन का उपयोग व्यावसायिक रियल एस्टेट के लिए किया गया और उन्हें अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है।