संसद द्वारा पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 ने खनिज प्रबंधन का नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंप दिया है, जिससे ओडिशा जैसे खनिज संपन्न राज्यों में भारी चिंता व्याप्त है। यह नया कानून राज्य की वित्तीय स्थिति और केंद्र-राज्य संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
- खनिज और खनिज युक्त भूमि के विनियमन का नियंत्रण अब पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास होगा।
- ओडिशा भारत के कुल खनिज उत्पादन मूल्य का 43.49% हिस्सा रखता है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था सीधे प्रभावित होगी।
- नए कानून के तहत राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज युक्त भूमि पर कोई कर या उपकर (Cess) नहीं लगा सकेंगी।
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बढ़ने का डर है।
संसद द्वारा 13 अगस्त को पारित और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति प्राप्त करने के बाद, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 ने भारत के संघीय ढांचे में एक नई बहस छेड़ दी है। इस संशोधन का सबसे बड़ा प्रभाव ओडिशा जैसे राज्यों पर पड़ेगा, जो देश के खनिज भंडार का केंद्र हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, जिसे विपक्षी दलों ने ओडिशा के लिए एक 'वित्तीय आपदा' करार दिया है।
मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में ओडिशा की हिस्सेदारी 43.49% है, जो किसी भी अन्य राज्य से कहीं अधिक है। राजस्थान (16.26%) और छत्तीसगढ़ (13.69%) जैसे राज्य इसके बाद आते हैं। नए अधिनियम का उद्देश्य खनिज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारी और गैर-समान करों को हटाना है, लेकिन इसका सीधा परिणाम राज्यों की राजस्व क्षमता में कटौती के रूप में दिख सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन का एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अधिनियम की धारा 2 में 'खदानों के विनियमन' के साथ 'खनिज युक्त भूमि' शब्द जोड़ना केंद्र को भूमि प्रबंधन पर भी अभूतपूर्व अधिकार देता है। यदि राज्य सरकारें खनिज अधिकारों पर उपकर (Cess) नहीं लगा पाती हैं, तो उनके पास स्थानीय विकास और पर्यावरण सुधार के लिए धन की भारी कमी हो जाएगी।
"यदि केंद्र सरकार खनिज युक्त भूमि पर राज्य के अधिकार और उपकर लगाने के अधिकार को छीन लेती है, तो ओडिशा के पास केवल प्रदूषण, विस्थापन और खनन का बोझ ही बचेगा।" - नवीन पटनायक
खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए, यह लड़ाई केवल आर्थिक नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु की है। सुकिंडा घाटी जैसे क्षेत्रों में, जहां भारत का 98% क्रोमाइट भंडार है, स्थानीय निवासी दशकों से हेक्सावलेंट क्रोमियम प्रदूषण के कारण कैंसर जैसी घातक बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि जब विनियमन केंद्र के पास चला जाएगा, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और विस्थापन के मुद्दों पर जवाबदेही तय करना कठिन हो जाएगा।
केंद्र सरकार का तर्क है कि यह संशोधन राज्यों के भूमि और खनिज अधिकारों को नहीं छीनता है और न ही राज्यों द्वारा एकत्र किए गए करों को प्रभावित करता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 'खनिज युक्त भूमि' के विनियमन पर नियंत्रण मिलने से राज्यों की स्वायत्तता पर गहरा प्रहार हुआ है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: नए संशोधन से राज्यों की आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
संशोधन के तहत राज्य सरकारें अब खनिज अधिकारों या खनिज युक्त भूमि पर कोई नया कर या उपकर (Cess) नहीं लगा सकेंगी, जिससे उनकी राजस्व वृद्धि सीमित हो सकती है।
प्रश्न 2: क्या यह कानून केवल बड़े खनिजों पर लागू होता है?
केंद्र सरकार के अनुसार, यह संशोधन लघु खनिजों (Minor Minerals) को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन प्रमुख खनिजों के प्रबंधन का नियंत्रण अब केंद्र के पास होगा।