NDA सरकार 2034 के बजाय 2029 में ही 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाओं के कार्यकाल को कम किया जा सकता है।
- NDA 2034 के बजाय 2029 में ही एक साथ चुनाव कराने की योजना बना रहा है।
- 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाओं के कार्यकाल को कम किया जा सकता है।
- संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत राज्यपाल विधानसभा भंग कर सकते हैं।
- विपक्ष ने इस कदम को असंवैधानिक और लोकतंत्र विरोधी बताया है।
भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के विचार को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एक महत्वाकांक्षी योजना पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, NDA वर्तमान में प्रस्तावित 2034 की समयसीमा को घटाकर 2029 करने की संभावना तलाश रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो उन 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव 2029 के साथ ही कराए जा सकते हैं, जहाँ वर्तमान में NDA का बहुमत है।
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विधानसभाओं के कार्यकाल में कटौती करना है। यदि NDA 2029 के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है, तो उसे उन राज्यों की विधानसभाओं को उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले ही भंग करना होगा जहाँ चुनाव 2027 या 2028 में होने वाले हैं। उदाहरण के तौर पर, गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कार्यकाल को तीन साल तक कम किया जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम न केवल चुनावी खर्च को कम करेगा, बल्कि देश में बार-बार होने वाली आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) की समस्या को भी हल करेगा। हालांकि, इसके लिए संवैधानिक संशोधनों और राज्यों की सहमति की भारी आवश्यकता होगी।
विधानसभाओं के कार्यकाल को कम करना एक जटिल संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें राज्यपाल की भूमिका और राज्यों की स्वायत्तता पर बड़े सवाल उठ सकते हैं।
संसदीय संयुक्त समिति वर्तमान में इस विषय पर विभिन्न हितधारकों, मुख्यमंत्रियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर रही है। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने स्पष्ट किया है कि 2029 की समयसीमा का निर्णय पूरी तरह से NDA के मुख्यमंत्रियों पर निर्भर करेगा। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कुछ अन्य नेताओं ने राष्ट्रीय हित में ऐसे समायोजन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया है।
दूसरी ओर, विपक्षी दल इस पूरे प्रस्ताव का कड़ा विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे 'असंवैधानिक' और 'जवाबदेही के विरुद्ध' करार दिया है। विपक्ष का तर्क है कि यह संघीय ढांचे को कमजोर करता है और क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता को कम करने की एक कोशिश है।
Frequently Asked Questions
1. क्या विधानसभाओं का कार्यकाल कम किया जा सकता है?
हाँ, यदि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर या बहुमत खोने पर विधानसभा भंग करते हैं, तो कार्यकाल कम किया जा सकता है।
2. 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ synchronized करना है ताकि बार-बार होने वाले चुनावों के खर्च और प्रशासनिक बाधाओं को कम किया जा सके।