केरल के त्रिपुनितुरा में आयोजित अथाचमयम जुलूस के दौरान पुणे की एक नाशिक ढोल टीम की प्रस्तुति ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस और माकपा ने आयोजन के 'भगवाकरण' का आरोप लगाया है, जबकि समिति ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
- त्रिपुनितुरा के ऐतिहासिक अथाचमयम जुलूस में पुणे की नाशिक ढोल टीम की भागीदारी पर विवाद।
- कांग्रेस और माकपा ने भगवा झंडा लहराने को लेकर आयोजन के 'भगवाकरण' का आरोप लगाया।
- आयोजन समिति ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि झंडा छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में लहराया गया था।
केरल के त्रिपुनितुरा में आयोजित प्रतिष्ठित अथाचमयम जुलूस, जो ओणम उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है, अब एक गंभीर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। 16 अगस्त को आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पुणे स्थित एक नाशिक ढोल टीम की प्रस्तुति ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और कांग्रेस दोनों ने आरोप लगाया है कि इस पारंपरिक आयोजन को 'भगवा रंग' में रंगने का प्रयास किया गया है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर एक भगवा झंडा लहराया गया। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] ने आयोजकों पर तीखा हमला बोला है। त्रिपुनितुरा के विधायक और पूर्व मंत्री के. बाबू ने कहा, "अथाचमयम के इतिहास में कभी भी राजनीति को इसमें शामिल करने की कोशिश नहीं की गई। नाशिक ढोल टीम को संघ परिवार का भगवा झंडा लहराने की अनुमति देना स्पष्ट रूप से इस आयोजन के भगवाकरण का प्रयास है।"
विपक्ष का आरोप है कि आयोजन समिति ने जानबूझकर ऐसे समूह को आमंत्रित किया जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रम का स्वरूप बदल जाए। LDF पार्षद और स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष ई.एस. राकेश पाई ने दावा किया कि नाशिक ढोल टीम को प्रायोजन (Sponsorship) के नाम पर लाया गया था और उनके आसपास RSS शाखाओं से जुड़े लोग तैनात थे, जो सांप्रदायिकरण की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।
सांस्कृतिक उत्सवों में राजनीतिक प्रतीकों का प्रवेश अक्सर स्थानीय सामाजिक ताने-बाने को अस्थिर करने का माध्यम बन जाता है।
BozokMedia विश्लेषण: राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केरल की राजनीति में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत है। त्रिपुनितुरा नगर पालिका में भाजपा के सत्ता में आने के बाद आयोजित यह पहला प्रमुख उत्सव है, जो इस विवाद को और अधिक संवेदनशील बना देता है।
दूसरी ओर, अथाघोषा समिति के अध्यक्ष और नगर पालिका चेयरपर्सन पी.एल. बाबू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी निर्णय सामूहिक परामर्श के बाद लिए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि पुणे की टीम ने प्रदर्शन के हिस्से के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में झंडा लहराया था, जिसका आरएसएस से कोई संबंध नहीं है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: विवाद का मुख्य कारण नाशिक ढोल टीम द्वारा कथित तौर पर भगवा झंडा लहराना है, जिसे विपक्ष ने 'भगवाकरण' का प्रयास माना है।
प्रश्न 2: आयोजन समिति का क्या पक्ष है?
उत्तर: समिति का कहना है कि झंडा छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में लहराया गया था और यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक था।