प्रसिद्ध इतिहासकार सुमित सरकार का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 'सबaltern स्टडीज' के माध्यम से भारतीय इतिहास को आम जनता के नजरिए से देखने की नई दृष्टि प्रदान की।

  • प्रसिद्ध इतिहासकार सुमित सरकार का 13 अगस्त, 2026 को निधन।
  • 'सबaltern स्टडीज' आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और भारतीय इतिहास लेखन के मार्गदर्शक।
  • नंदीग्राम हिंसा के विरोध में अपना प्रतिष्ठित 'रवींद्र पुरस्कार' लौटाया।
  • इतिहास को 'नीचे से' (आम जनता के नजरिए से) देखने की वकालत की।

भारतीय इतिहास लेखन के क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है। प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार का 13 अगस्त, 2026 को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जाना केवल एक विद्वान का जाना नहीं है, बल्कि उस बौद्धिक विरासत का अंत है जिसने दशकों तक भारत के अतीत को देखने के हमारे नजरिए को चुनौती दी और बदला।

सुमित सरकार का नाम 1970 के दशक के अंत में उभरे 'सबaltern स्टडीज' (Subaltern Studies) आंदोलन के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। इस आंदोलन ने इतिहास लेखन के पारंपरिक तरीकों को बदलकर 'नीचे से इतिहास' (History from below) लिखने की शुरुआत की। जहाँ पारंपरिक इतिहासकार केवल बड़े नेताओं और राजनीतिक दलों पर ध्यान केंद्रित करते थे, वहीं सरकार और उनके साथियों ने किसानों, मजदूरों और आदिवासी समुदायों की आवाजों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया।

इतिहास लेखन में एक नई क्रांति

सुमित सरकार की पहली महत्वपूर्ण पुस्तक, 'The Swadeshi Movement in Bengal, 1903-1908' (1973), ने बंगाल के स्वादेशी आंदोलन को केवल अभिजात वर्ग के संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि श्रमिकों और छोटे कारीगरों के विद्रोह के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने यह साबित किया कि आम जनता की राजनीति स्वायत्त थी और वह केवल राष्ट्रीय नेताओं के निर्देशों का पालन नहीं करती थी।

सुमित सरकार ने इतिहास को केवल राजाओं और नेताओं की गाथा से निकालकर उसे आम आदमी के संघर्षों का दस्तावेज बना दिया।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, सरकार का योगदान केवल इतिहास लिखने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने इतिहास के सिद्धांतों पर भी सवाल उठाए। दिलचस्प बात यह है कि वे अपने ही बनाए 'सबaltern' समूह के सबसे मुखर आलोचक भी बने। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इतिहास लेखन में अत्यधिक उत्तर-आधुनिकतावाद (Post-modernism) कुछ हद तक दक्षिणपंथी विचारधारा के तर्क के करीब पहुँच सकता है, जो उनके वैचारिक साहस को दर्शाता है।

नैतिक साहस और वैचारिक दृढ़ता

सुमित सरकार केवल एक पुस्तकालय तक सीमित विद्वान नहीं थे; उनके पास अडिग नैतिक साहस था। 2007 में, पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार द्वारा नंदीग्राम में किसानों पर की गई पुलिस फायरिंग के विरोध में, उन्होंने अपना रवींद्र पुरस्कार लौटा दिया। उन्होंने तर्क दिया कि स्वतंत्र भारत में राज्य द्वारा की गई यह हिंसा औपनिवेशिक काल के अत्याचारों से भी अधिक चौंकाने वाली थी।

ऐतिहासिक विरासत

उनका जन्म कलकत्ता के एक प्रबुद्ध ब्रह्म परिवार में हुआ था। उनके पिता सुशोभन सरकार एक प्रसिद्ध मार्क्सवादी इतिहासकार थे। सुमित सरकार ने 'Modern India, 1885-1947' जैसी कालजयी कृतियाँ लिखीं, जो आज भी दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए आधारभूत पाठ्यपुस्तकें हैं।

Did You Know?: सुमित सरकार ने इतिहास के सूक्ष्म विवरणों (Microhistory) को समझने के लिए बंगाल के दूरदराज के गांवों के पुराने समाचार पत्रों का गहन अध्ययन किया था।

Frequently Asked Questions

1. सुमित सरकार का मुख्य योगदान क्या था?
उनका मुख्य योगदान भारतीय इतिहास को 'सबaltern' या आम जनता (किसान, मजदूर) के दृष्टिकोण से लिखना था।

2. उन्होंने रवींद्र पुरस्कार क्यों लौटाया था?
उन्होंने नंदीग्राम में किसानों पर हुई राज्य की हिंसा के विरोध में अपना सम्मान लौटाया था।