कर्नाटक सरकार ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार, उपमुख्यमंत्री जी. परमैशवरा और मंत्रियों के शपथ समारोह के लिये कुल 38.25 लाख रुपये मंजूर किए। यह खर्च अतिरिक्त अनुमान विधेयक के माध्यम से पारित हुआ, जो भाजपा के विरोध के बीच आया।
- शपथ समारोह पर कुल खर्च 38.25 लाख रुपये
- धनराशि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिये उपयोगी
- बिल को भाजपा विरोध के बीच पारित किया गया
समारोह का विस्तृत खर्चा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार तथा उपमुख्यमंत्री जी. परमैशवरा के शपथ ग्रहण के लिये सरकार ने 38.25 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की। यह राशि सहायक अनुमान विधेयक के तहत पारित हुई, जिसमें कुल 7,028.97 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुमान शामिल थे, जिनमें केंद्र से 2,648.38 करोड़ रुपये की सहायता भी सम्मिलित है।
अन्य प्रमुख व्यय
विधेयक में अन्य प्रमुख खर्चों में 1.2 करोड़ रुपये का उपयोग पूर्व मंत्री डी. सुधाकर के चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति के लिये, 19.50 लाख रुपये कुर्मराकृपा गेस्ट हाउस की मरम्मत, तथा 60 लाख रुपये कुर्मराकृपा एंक्स के आवासीय क्वार्टरों के निर्माण‑मरम्मत कार्यों के लिये किया गया। टु्मकुरु में लाभार्थियों को लाभ बाँटने के लिये 5 करोड़ रुपये का आयोजन, तथा विधानसभा स्पीकर और विपक्षी मुख्य व्हिप के लिये क्रमशः 33 लाख और 31 लाख रुपये की नई गाड़ियों की खरीद भी मंजूर हुई।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह खर्च BJP के विरोध के बीच आया, जब विपक्ष ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। कांग्रेस‑शासन ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) को लेकर भी विवाद को उजागर किया, लेकिन इस योजना के लिये लगभग 2,914 करोड़ रुपये राज्य की ओर से आवंटित किए गए।
आर्थिक एवं सामाजिक पहलू
सूखा‑प्रवण परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्रों में आपातजल कार्यों के लिये 288 करोड़ रुपये की मांग की गई है। नई स्थापित भारत जोड़ो युवा संघ को 791 करोड़ रुपये का बजट मिला, जबकि सड़कों, वार्ड‑रोड्स और बंगलौर विकास कार्यों के लिये 1,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जारी किए गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such high‑profile ceremonial spending, especially amid fiscal constraints and political protests, signals the government's attempt to project stability while risking public criticism over resource allocation.
"शपथ समारोह का खर्च आम तौर पर सीमित रहता है; इस स्तर का बजट राजनैतिक संदेश देने के लिये अधिक होता है," वित्तीय विश्लेषक अंजलि मेहता ने कहा।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या इस खर्च को राज्य के सामान्य बजट से हटाया गया है?
Ans: नहीं, यह खर्च विशेष रूप से सहायक अनुमान विधेयक के तहत अतिरिक्त अनुमान से वित्त पोषित किया गया है।
Q2: क्या विपक्ष इस खर्च को चुनौती देगा?
Ans: भाजपा ने पहले ही इस खर्च को राजनीतिक रूप से उपयोगी बताया है और भविष्य में इस पर प्रश्न उठाने की संभावना है।