कर्नाटक विधानसभा में भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर अदानी समूह को विशेष सुविधाएँ देने का आरोप लगाया। विपक्षी नेता आर. अशोक ने बताया कि सरकार ने पार्कों की जमीन को 5% तक बेचने की अनुमति देने वाला बिल पारित किया, जिससे टनल प्रोजेक्ट में अदानी को फायदा हो सकता है।
- भाजपा ने अदानी को लाल कार्पेट बिछाने का आरोप लगाया
- कर्नाटक सरकार ने पार्कों में 5% जमीन बेचने की मंजूरी दी
- 17.1 किमी के टनल प्रोजेक्ट में अदानी एंटरप्राइज़ेज सबसे कम बोलीदाता
आर. अशोक ने कर्नाटक विधानसभा में तर्क दिया कि राज्य सरकार ने कर्नाटक सरकार पार्क्स (संरक्षण) (संशोधन) बिल, 2026 को पास करके अदानी समूह को विशेष लाभ दिया। यह बिल सार्वजनिक उपयोग के लिये पार्क एवं बगीचा जमीन का 5% तक बिक्री, लीज, उपहार, विनिमय या बंधक करने की अनुमति देता है।
भाजपा ने इस कदम को "अदानी को लाल कार्पेट बिछाने" के रूप में वर्णित किया, जबकि दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं ने अदानी को "बीजेपी एजेंट" कहा है। यह दोहरी मानदंडों का मामला पार्टी के बीच तीव्र तनाव का कारण बन गया है।
अशोक का कहना है कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य 17.1 किमी लंबा बेंगलुरु नॉर्थ‑साउथ ट्विन टनल रोड प्रोजेक्ट है, जो हेब्बल को सेंट्रल सिल्क बोर्ड जंक्शन से जोड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अदानी समूह इस प्रोजेक्ट को निष्पादित करने वाला मुख्य ठेकेदार है।
यह टनल प्रोजेक्ट अदानी एंटरप्राइज़ेज की सबसे कम बोली, ₹22,267 करोड़, पर जारी हुआ, जो राज्य सरकार के शुरुआती अनुमान से अधिक है। इस बोली को लेकर लागत और राजनीतिक जुड़ाव दोनों पर बहस चल रही है।
केंद्र में राहुल गांधी ने कई बार अदानी समूह पर निशाना साधा है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निकटतम व्यावसायिक सहयोगी बताया है। इस संदर्भ में कर्नाटक में इस परियोजना को लेकर उठ खड़े हुए प्रश्न राष्ट्रीय राजनीति में भी गूँजते हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the controversy highlights the growing entanglement of corporate interests with regional infrastructure policies, potentially reshaping voter sentiment ahead of the next state elections.
"यदि सरकार सार्वजनिक जमीन को निजी उद्यमों को सौंपती रहती है, तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर असर पड़ता है," कहा राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सीमा कुमारी ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या टनल प्रोजेक्ट को रद्द किया जा सकता है?
उत्तर: विपक्ष का दावा है कि यदि सार्वजनिक विरोध जारी रहता है और अदालत में चुनौती सफल होती है, तो प्रोजेक्ट को स्थगित या रद्द किया जा सकता है।
प्रश्न 2: इस बिल का भविष्य में कौन-से अन्य परियोजनाओं पर असर पड़ेगा?
उत्तर: विशेषज्ञ मानते हैं कि समान संशोधनों से राज्य के अन्य बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स, जैसे हवाई अड्डा विस्तार और जल संरक्षण योजनाओं, पर प्रभाव पड़ सकता है।