भर्ती राष्ट्र समिति (BRS) ने कांग्रेस-शासित तेलंगाना सरकार को एएल नीनो के नाम पर किसानों की आशा तोड़ने का आरोप लगाया। पूर्व मंत्री एस. निरंजन रेड्डी ने कहा, आंध्र प्रदेश स्रीसैलम से जल निकालकर तेलंगाना के जलसंकट को बढ़ा रहा है।

  • AP ने स्रीसैलम जल स्तर 854 ft से ऊपर पहुँचते ही बड़ी मात्रा में पानी निकाला।
  • BRS ने तेलंगाना में जल वितरण के लिए क़लवाकुर्थी, पल्लमरु‑रंगरेड्डी और जुराला पंपों को चालू करने की मांग की।
  • जुराला परियोजना को कर्नाटक के अल्मत्ती‑नरयनपुर जल से 5,000 क्यूसेक्‍स की पुनर्जनित आपूर्ति मिलने की संभावना।

पृष्ठभूमि

स्रीसैलम बांध 1979 में जलविद्युत उत्पादन और बाद में मैदानी जल तथा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया था। शुरुआती वर्षों में इसे मुख्यतः तेलंगाना और कर्नाटक के बीच बंटा गया था, लेकिन समय के साथ आंध्र प्रदेश ने अपनी जल मांग बढ़ाने के लिए कई संशोधन करवाए।

वर्तमान विवाद

पूर्व मंत्री एस. निरंजन रेड्डी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि आंध्र प्रदेश ने स्रीसैलम जल स्तर 875.8 ft पर पहुँचते ही बड़ी मात्रा में जल निकाला, जिससे तेलंगाना के भीतर जल उपलब्धता घट गई। उन्होंने कहा कि जल को बाहर‑बेसिन क्षेत्रों में ले जाने के लिए AP ने 235 ट्रमिलियन क्यूबिक फ़ुट क्षमता वाले जल‑धारण वाले जलाशयों का निर्माण किया, बिना कोई आधिकारिक वाटर एलोकेशन या मंजूरी के।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भर्ती राष्ट्‍र समिति (BRS) ने कांग्रेस‑शासित सरकार पर “एल नीनो” के नाम पर किसानों की आशा को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जल को बाहर‑बेसिन क्षेत्रों में ले जाने से तेलंगाना के कृषि क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुँचेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्रीसैलम का मूल उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन था, परन्तु 1990 के दशक में द्रव्यमान जल‑संधारण और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए इसे पुनः उपयोग किया गया। 2000 के बाद से जल‑संकट के कारण दोनों राज्यों के बीच कई बार जल‑विवाद हुए हैं, लेकिन इस बार AP द्वारा जल निकासी की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that continued over‑extraction by Andhra Pradesh could trigger a severe agrarian crisis in Telangana, potentially influencing the upcoming state elections and reshaping regional water‑sharing agreements.

"यदि जल का संतुलित वितरण नहीं हुआ, तो दोनों राज्यों की कृषि‑आधारित अर्थव्यवस्थाएँ जोखिम में पड़ सकती हैं," कहा जल‑प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Did You Know?: स्रीसैलम बांध की मूल डिजाइन क्षमता 1,770 क्यूसेक्‍स थी, परन्तु आज यह 5,000 क्यूसेक्‍स तक की मांग को पूरा कर रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या तेलंगाना के पास जल‑आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए कोई वैकल्पिक स्रोत है?
उत्तर: वर्तमान में जल‑आपूर्ति को संतुलित करने हेतु तेलंगाना कई छोटे जलाशयों और जल‑संरक्षण परियोजनाओं पर निर्भर है, परन्तु वे स्रीसैलम के स्तर के बराबर नहीं हैं।

प्रश्न 2: क्या केंद्र सरकार इस विवाद में हस्तक्षेप कर रही है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों को जल‑संधि के पुनरावलोकन के लिए एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा है, परन्तु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।