कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकरजुन खड़गे ने मोदी सरकार को शिक्षा‑से‑रोज़गार की राह को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 20‑29 वर्ष के 67% बेरोज़गार स्नातक हैं और अनाज‑सब्ज़ी की कीमतें आम आदमी की पहुँच से बाहर हो रही हैं।
- निटि आयोग के अनुसार 15‑29 वर्ष के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे हैं, न काम कर रहे हैं, न प्रशिक्षण ले रहे हैं।
- स्नातकों में बेरोज़गारी 67% तक पहुंच गई, विशेषकर युवा महिलाओं में 19.5% तक।
- शक्कर, प्याज़, दूध और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज़ी से वृद्धि।
कांग्रेस ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को नरेंद्र मोदी सरकार पर युवा बेरोज़गारी और मूलभूत वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए कड़ी आलोचना की। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकरजुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने ‘शिक्षा से रोजगार तक’ की पूरी राह को ‘विनाश’ कर दिया है।
खड़गे ने हाल ही में निटि आयोग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 15 से 29 वर्ष के 8.7 करोड़ भारतीय न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न काम और न ही प्रशिक्षण ले रहे हैं। जुलाई 2026 के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार युवा बेरोज़गारी 15.6% है, जो युवा महिलाओं में 19.5% तक पहुंच गई है।
कहाँ हैं स्नातक के बाद नौकरियां? खड़गे ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि 20‑29 वर्ष के बेरोज़गार भारतीयों में स्नातकों का अनुपात 67% है। उन्होंने सरकार द्वारा दो करोड़ नौकरियों का वार्षिक निर्माण वादा भी सवाल में उठाया, यह तर्क देते हुए कि 12 वर्षों में 24 करोड़ नौकरियों का सृजन होना चाहिए था।
भर्ती में देरी, अनुबंध‑आधारित काम, और कौशल अंतर को भी उन्होंने प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा, “महँगा और अपर्याप्त शिक्षा, कागज़ी लीक, भर्ती में देरी, widening skills gap, और गुणवत्तापूर्ण नौकरियों का गायब होना एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को खतरे में डाल रहा है।”
कांग्रेस के संवाद प्रमुख जयाराम रामेश ने अनाज और सब्ज़ियों की कीमतों में उछाल पर टिप्पणी की। उन्होंने नासिक में प्याज़ की कीमतों में 76% वृद्धि और कुछ राज्यों में थोक दरों के दोगुने होने का हवाला दिया। शक्कर, दूध, तेल और फलों की कीमतें भी आम आदमी की पहुँच से बाहर हो रही हैं।
निटि आयोग की “Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047” रिपोर्ट, 2021 के राष्ट्रीय नमूना सर्वे के 78वें दौर के डेटा पर आधारित, उपभोक्ताओं को स्वयंरोज़गार के लिए सब्सिडी‑आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सिफारिश करती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the convergence of rising commodity prices and stagnant youth employment could erode middle‑class purchasing power, potentially slowing India’s GDP growth trajectory and influencing upcoming electoral outcomes.
“यदि सरकार ने कौशल विकास में वास्तविक निवेश नहीं किया तो युवा वर्ग का आर्थिक भविष्य अंधकार में डूब जाएगा।” – श्रम नीति विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह
Frequently Asked Questions
- क्या सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कोई नई नीति पेश की है? अभी तक कोई व्यापक राष्ट्रीय योजना सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन विभिन्न राज्य स्तर पर स्किलिंग प्रोग्राम चल रहे हैं।
- वर्तमान में कौन सी वस्तुओं की कीमतें सबसे अधिक बढ़ी हैं? शक्कर, प्याज़, दूध और तेल को प्रमुख महंगाई वस्तुओं के रूप में दर्शाया गया है।