ड्राविडा मुनेत्रा कजगम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में टीवीके उम्मीदवार वी.एस. बाबु की जीत को रद्द करने के लिए मदरास हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में 100 % वीवीपीएटी गिनती और सभी 286 ईवीएम मशीनों की जांच का आदेश मांगा गया है।

  • स्टालिन ने कोलाथुर में V.S. बाबु की जीत को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
  • याचिका में 100 % वीवीपीएटी गिनती और 286 ईवीएम की पूर्ण जांच की मांग की गई।
  • असामान्य तकनीकी त्रुटियों की रिपोर्ट को अनदेखा करने पर कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा गया।

पृष्ठभूमि

2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर क्षेत्र को टीवीके के उम्मीदवार वी.एस. बाबु ने जकड़ लिया, जबकि डेमोक्रेटिक गठबंधन का प्रमुख एम.के. स्टालिन इस परिणाम को अस्वीकार कर रहे हैं। चुनाव के बाद स्टालिन ने वरिष्ठ वकील एन.आर. एलांगो को तकनीकी जांच के लिए नियुक्त किया।

याचिका के मुख्य बिंदु

स्टालिन की याचिका में कहा गया है कि चयनित 14 ईवीएम सेटों के कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपीएटी में जलने वाले मेमोरी/माइक्रोकंट्रोलर की जाँच में गंभीर irregularities पाई गईं। एलांगो ने इन irregularities को जिला चुनाव अधिकारी को लिखित रूप में सूचित किया, परन्तु अधिकारी ने इसे खारिज कर दिया।

असामान्य त्रुटियों की रिपोर्ट

जांच के दौरान कई मशीनों में डेटा लॉस, टाइमस्टैम्प में असंगति और वीवीपीएटी स्लिप के मिलान में विसंगतियां सामने आईं। एलांगो ने इन तकनीकी विफलताओं के विस्तृत कारणों की मांग की, लेकिन जिला चुनाव अधिकारी ने केवल प्रमाण पत्र जारी कर प्रक्रिया को सफल बताया।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

निरंतर अनुरोधों के बावजूद, चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया। इस कारण स्टालिन ने सीधे हाई कोर्ट में जाकर आदेश को रद्द करने की कोशिश की है।

स्टालिन की अतिरिक्त मांगें

स्टालिन ने केवल जीत को रद्द करने की ही नहीं, बल्कि कोलाथुर में 100 % वीवीपीएटी स्लिप की गिनती और सभी 286 मशीनों की पुनः तकनीकी जाँच का आदेश भी मांगा है। उनका मानना है कि केवल आधे डेटा पर चुनाव परिणाम मान्य नहीं हो सकते।

कानूनी प्रभाव

यदि कोर्ट स्टालिन की याचिका को स्वीकार करता है, तो यह तमिलनाडु में भविष्य के चुनावों में ईवीएम और वीवीपीएटी की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठाएगा। यह निर्णय अन्य राज्यों में समान चुनौतियों के लिए मिसाल बन सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the outcome of this petition could reshape electoral oversight mechanisms across India, compelling the Election Commission to adopt stricter verification protocols for electronic voting devices.

"ईवीएम की तकनीकी जाँच में पारदर्शिता न सिर्फ चुनावी वैधता बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास को भी बचाएगी," कहते हैं चुनाव कानून विशेषज्ञ डॉ. अनीता राव।
Did You Know?: तमिलनाडु में 2016 के चुनाव के बाद पहली बार वीवीपीएटी गिनती को अनिवार्य किया गया था, लेकिन पूर्ण गिनती अब तक केवल दो बार ही हुई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हाई कोर्ट में इस याचिका का क्या संभावित परिणाम हो सकता है?

उत्तर: यदि कोर्ट जीत को रद्द कर देती है तो एक नई गिनती या पुनः चुनाव की संभावना बढ़ सकती है।

प्रश्न 2: इस मामले में ईवीएम की तकनीकी जाँच क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: ईवीएम में किसी भी तकनीकी त्रुटि से मतदाता की आवाज़ का सही प्रतिबिंब नहीं मिल पाता, जिससे चुनावी परिणाम पर सवाल उठते हैं।