पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को रद्द करने के सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है, इसे राज्य के विकास के लिए एक गंभीर झटका बताया है। डीएमके विधायकों ने इस मुद्दे पर विधानसभा से वॉकआउट किया।
- एम.के. स्टालिन ने परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को रद्द करने के फैसले को तमिलनाडु के विकास के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया है।
- डीएमके विधायकों ने विधानसभा में चर्चा की अनुमति न मिलने पर सदन से वॉकआउट किया।
- स्टालिन के अनुसार, यह निर्णय राज्य के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को खतरे में डाल सकता है।
- परियोजना के लिए 90% भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा किया जा चुका था।
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने सोमवार को एक कड़ा बयान देते हुए कहा कि चेन्नई के पास परंदूर में हवाई अड्डा बनाने की योजना को छोड़ने का निर्णय केवल एक बदलाव नहीं, बल्कि तमिलनाडु की विकास यात्रा के लिए एक 'अपूरणीय क्षति' है। स्टालिन ने चेतावनी दी कि इस निर्णय से राज्य का विकास कई साल पीछे चला जाएगा।
स्टालिन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात से लेकर ऑटोमोबाइल तक विभिन्न क्षेत्रों में देश का नेतृत्व कर रहा है, और राजधानी में एक विश्व स्तरीय हवाई अड्डे की आवश्यकता केवल एक इच्छा नहीं बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के हितों को तुच्छ राजनीतिक कारणों के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकता।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि परंदूर हवाई अड्डा परियोजना केवल बुनियादी ढांचे का मामला नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु की वैश्विक औद्योगिक स्थिति से जुड़ा है। यदि सरकार नए स्थान की तलाश में पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करती है, तो इससे न केवल समय की बर्बादी होगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है।
परंदूर हवाई अड्डे का निर्णय तमिलनाडु के औद्योगिक भविष्य और रोजगार के सपनों के लिए एक विनाशकारी प्रहार है।
पूर्व वित्त और उद्योग मंत्री थांगम तेननरासु ने कहा कि परंदूर एक 'ग्रीनफील्ड' हवाई अड्डे के लिए सबसे उपयुक्त स्थान था। उन्होंने खुलासा किया कि 5,740 एकड़ भूमि में से 90% का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भूमि का अधिग्रहण केवल हवाई अड्डे के लिए किया गया था, तो अब उस भूमि का क्या होगा?
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आर्थिक प्रभाव
द्रविड़ मॉडल के तहत, तमिलनाडु ने खुद को निवेशकों के लिए पहली पसंद बनाया था। परंदूर हवाई अड्डे की उम्मीद में श्रीपेरंबुदूर जैसे क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई थी। बेंगलुरु हवाई अड्डे की सफलता का उदाहरण देते हुए, तेननरासु ने तर्क दिया कि चेन्नई को भी औद्योगिक विकास के लिए एक बड़े कार्गो और यात्री हवाई अड्डे की तत्काल आवश्यकता है।
| विशेषता | परंदूर परियोजना (पूर्व योजना) | नई स्थिति (वर्तमान) |
|---|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | 90% पूर्ण | अनिश्चित/रद्द |
| विकास लक्ष्य | 1-1.5 ट्रिलियन USD अर्थव्यवस्था | विकास दर में गिरावट का जोखिम |
| औद्योगिक प्रभाव | इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल को बढ़ावा | निवेशकों का पलायन संभव |
विधानसभा में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ। अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने नियम 110 के तहत चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद डीएमके के सदस्यों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।
Frequently Asked Questions
1. एम.के. स्टालिन ने इस निर्णय का विरोध क्यों किया?
स्टालिन का मानना है कि इस निर्णय से तमिलनाडु का औद्योगिक विकास रुक जाएगा और राज्य के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करना कठिन हो जाएगा।
2. विधानसभा में क्या हुआ?
चर्चा की अनुमति न मिलने के कारण डीएमके विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया।