केरल के सबसे अधिक जनसंख्या वाले मालप्पुरम जिले को विभाजित करने की मांग पर भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूमएल) ने आधिकारिक समर्थन दिया है। पार्टी का कहना है कि जनसंख्या को मुख्य मानदंड बनाकर जिलों का पुनर्गठन संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करेगा।

  • आईयूमएल ने मालप्पुरम के दो हिस्सों में विभाजन की मांग का आधिकारिक समर्थन किया।
  • लगभग 48 लाख जनसंख्या तीन नए जिलों की मानक को पूरा करती है।
  • जनसंख्या के आधार पर जिलों का पुनर्गठन संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए आवश्यक है।

केरल में सबसे अधिक जनसंख्या वाला मालप्पुरम जिला अब विभाजन की मांग के केंद्र में है। भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूमएल) ने राज्य के भीतर जनसंख्या को मुख्य मानदंड बनाते हुए इस मांग को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया है।

आईयूमएल के राज्य महासचिव पी.एम.ए. सलाम ने कहा कि जिलों का पुनर्गठन केवल जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए, जिससे सरकारी सेवाओं और संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा, “यदि जनसंख्या ही मानदंड है, तो मालप्पुरम को तीन जिलों में विभाजित करने का पर्याप्त आधार है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मालप्पुरम जिला 1969 में स्थापित हुआ था और वर्तमान में 3,550 वर्ग किलोमीटर में सात तालुके, 16 विधानसभा और दो लोकसभा क्षेत्र शामिल हैं। 2011 की जनगणना में इसकी जनसंख्या 41.3 लाख थी, जबकि अब यह लगभग 48 लाख तक पहुँच गई है।

पिछले कुछ वर्षों में कई सामाजिक संगठनों ने भी इस विभाजन की माँग की है, जिनमें जामा-ए-इस्लामी, वेलफ़ेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया, सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट और दो फेक्शन के सामस्थ केरल जमीअतुल उलमा शामिल हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a split could reshape political equations in Kerala, potentially altering vote banks for the UDF and LDF alliances, while also addressing administrative overload in Malappuram.

“जनसंख्या-आधारित जिलों का पुनर्गठन संसाधन वितरण में असमानता को कम करेगा।” — प्रदेश के एक प्रशासनिक विशेषज्ञ
Did You Know?: मालप्पुरम पहले कभी दो जिलों में बंटा नहीं था, जबकि केरल में कई छोटे जनसंख्या वाले जिले पहले से ही दो या अधिक हिस्सों में विभाजित हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मालप्पुरम विभाजन से किस तरह के प्रशासनिक लाभ मिलेंगे?
उत्तर: संसाधन आवंटन में समानता, सार्वजनिक सेवाओं की तेज़ पहुँच, और स्थानीय शासन की दक्षता में सुधार।

प्रश्न 2: क्या नई जिलों की सीमाएँ तय होंगी?
उत्तर: सीमाओं का निर्धारण जनसंख्या, भूगोल और मौजूदा तालुका संरचना के आधार पर किया जाएगा।