तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 2027 पोंगल से शुरू होने वाले "अन्नपूर्णा सुपर सिक्स" योजना के तहत 1.30 करोड़ परिवारों को तीन एलपीजी सिलेंडर की लागत प्रतिपूर्ति करने का वादा किया। इस योजना की अनुमानित लागत लगभग ₹4,000 करोड़ होगी और यह वार्षिक आय ₹2.5 लाख तक वाले परिवारों, छोटे किसान और विकलांग व्यक्तियों को लक्षित करेगी।
- 130 लाख परिवारों को सालाना 3 एलपीजी सिलेंडर की लागत प्रतिपूर्ति
- अनुदान ₹4,000 करोड़, पात्रता आय ≤ ₹2.5 लाख, किसान व विकलांग
- भुगतान सीधे बैंक खातों में, पोंगल 2027 से लागू
परियोजना की रूपरेखा
तमिलनाडु विधानसभा में 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने "अन्नपूर्णा सुपर सिक्स" योजना का विवरण प्रस्तुत किया। इस योजना के तहत पात्र घरों को प्रति वर्ष तीन घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत सरकार प्रतिपूर्ति करेगी, जिससे कुल 1,30,16,104 परिवार लाभान्वित होंगे।
आर्थिक अनुमान और वित्तीय प्रभाव
राज्य ने इस योजना के लिए लगभग ₹4,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है। यह खर्च राज्य की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बनाता है, परंतु सरकार ने इसे जनकल्याण और चुनावी वादे के रूप में सिद्ध करने के लिए प्राथमिकता दी है।
पात्रता मानदंड
पात्रता के लिये निम्न शर्तें निर्धारित की गईं: वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक न हो, मध्य एवं सीमांत किसान, तथा विकलांग व्यक्तियों के परिवार। इन समूहों को राज्य द्वारा सूचीबद्ध करने के बाद सिलेंडर वितरित किए जाएंगे और लागत सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी।
पिछला संदर्भ और एलपीजी संकट
पिछले चार महीनों में पश्चिमी एशिया के युद्ध के कारण एलपीजी सिलेंडर की गंभीर कमी देखी गई थी, जिससे कई परिवारों को वैकल्पिक ईंधन अपनाना पड़ा। इस कारण से ईंधन कीमतों में तेज़ी ने गरीब परिवारों की आय पर दबाव बढ़ाया। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए सरकार ने इस राहत उपाय को त्वरित करने का निर्णय लिया।
राजनीतिक प्रतिज्ञा का कार्यान्वयन
"अन्नपूर्णा सुपर सिक्स" योजना टामिलगावेत्री कज़हगम (TVK) की प्रमुख चुनावी प्रतिज्ञा थी, जिसे 2026 विधानसभा चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनाया गया था। मुख्यमंत्री विजय ने कहा, "वित्तीय संकट के बावजूद, हम लोगों के बोझ को कम करने और हमारे चुनावी वादे को निभाने के लिए यह कदम उठाते हैं।"
कार्यान्वयन प्रक्रिया
सरकार तेल कंपनियों से पात्र परिवारों की सूची प्राप्त करेगी, पंजीकरण के बाद सिलेंडर वितरित किए जाएंगे और फिर संबंधित राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। यह डिजिटल प्रक्रिया भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
"सरकारी रिफंड मॉडल ग्रामीण एवं शहरी गरीबों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण कदम है," ऊर्जा नीति विशेषज्ञ डॉ. अजय मेनन ने कहा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the scheme not only addresses immediate fuel affordability but also sets a precedent for cash‑transfer based welfare in Indian states, potentially reshaping subsidy delivery mechanisms nationwide.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह रिफंड केवल एलपीजी सिलेंडर के लिए ही है या अन्य ईंधनों पर भी लागू होगा?
उत्तर: वर्तमान में यह योजना विशेष रूप से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत को कवर करने के लिए है। भविष्य में अन्य ईंधनों के लिए विस्तार की संभावना पर सरकार पर विचार किया जा रहा है।
प्रश्न 2: पात्रता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: राज्य तेल कंपनियों के साथ समन्वय करके पंजीकरण किया जाएगा, लाभार्थियों को सिलेंडर मिलने के बाद उनकी आय एवं कृषि स्थिति के आधार पर सूची तैयार की जाएगी और बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की जाएगी।