विश्व बैंक के एक अध्ययन ने खुलासा किया है कि सऊदी अरब से लौटने वाले केरल के प्रवासी पुरुष लैंगिक मानदंडों और घरेलू हिंसा के प्रति अधिक रूढ़िवादी हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए समुदाय के भीतर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है।
- विश्व बैंक के 2022 के अध्ययन में केरल के प्रवासी श्रमिकों के सामाजिक व्यवहार में बदलाव पाया गया।
- सऊदी अरब से लौटने वाले पुरुषों में लैंगिक हिंसा और घरेलू निर्णय लेने के प्रति अधिक रूढ़िवादी दृष्टिकोण देखा गया।
- शशि थरूर ने इस प्रवृत्ति को केरल की प्रगतिशील परंपराओं के लिए खतरा बताया है।
- आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शामिका रवि ने भी इन निष्कर्षों की पुष्टि की है।
केरल की अर्थव्यवस्था दशकों से खाड़ी देशों से आने वाले प्रेषण (remittances) पर टिकी है, लेकिन एक हालिया विश्व बैंक के अध्ययन ने इस आर्थिक समृद्धि के पीछे एक चिंताजनक सामाजिक पहलू को उजागर किया है। अध्ययन से पता चलता है कि सऊदी अरब जैसे देशों से लौटने वाले केरल के पुरुष, गैर-प्रवासी पुरुषों की तुलना में लैंगिक मानदंडों और सामाजिक मूल्यों के मामले में काफी अधिक रूढ़िवादी हो गए हैं।
सामाजिक मानदंडों का हस्तांतरण
विश्व बैंक का नीतिगत शोध पत्र, जिसका शीर्षक 'Beyond Money: Does Migration Experience Transfer Gender Norms?' है, यह विश्लेषण करता है कि क्या प्रवास केवल पैसा ही नहीं, बल्कि गंतव्य देश के सामाजिक मूल्य भी वापस लाता है। शोध के अनुसार, सऊदी अरब से लौटने वाले प्रवासियों में महिलाओं के प्रति शारीरिक हिंसा और घरेलू निर्णय लेने की प्रक्रिया में अत्यधिक रूढ़िवादी दृष्टिकोण पाया गया। यह अध्ययन मार्च 2022 में प्रकाशित हुआ था, लेकिन हाल ही में चर्चा में आने के बाद इसने एक नई बहस छेड़ दी है।
विदेशी देशों से रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण और रीति-रिवाजों का आयात केरल की सामाजिक परंपराओं के विपरीत है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कहा कि केरल हमेशा से एक उदार और प्रगतिशील समाज रहा है, जहाँ मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक भागीदारी का एक शानदार रिकॉर्ड रहा है। थरूर ने जोर देकर कहा कि इस तरह के कट्टरपंथी विचारों का आगमन केरल की सांप्रदायिक सद्भाव और सह-अस्तित्व की संस्कृति के लिए एक बड़ी चुनौती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह केवल एक सामाजिक अध्ययन नहीं है, बल्कि यह केरल के उस सामाजिक ताने-बाने पर सवाल उठाता है जिसे 'सांप्रदायिक सद्भाव का मॉडल' माना जाता है। यदि प्रवास के साथ कट्टरपंथी विचार घर लौट रहे हैं, तो यह भविष्य में लैंगिक समानता और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शामिका रवि ने भी इन निष्कर्षों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन पिछले तीन दशकों से केरल में मिल रही अनौपचारिक रिपोर्टों की पुष्टि करता है। विशेष रूप से, सऊदी अरब से लौटने वालों में लैंगिक हिंसा के प्रति दृष्टिकोण गैर-प्रवासियों की तुलना में तीन मानक विचलन (standard deviations) अधिक रूढ़िवादी पाया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ
केरल का इतिहास धार्मिक समन्वयवाद (syncretism) का रहा है। चाहे वह मंदिरों द्वारा मस्जिदों के लिए स्थान देना हो या मुस्लिम समुदायों द्वारा हिंदू परंपराओं का सम्मान करना, केरल ने हमेशा प्रगतिशील मूल्यों को अपनाया है। यह रिपोर्ट उस सामाजिक प्रगति के लिए एक चेतावनी की तरह है।
| विशेषता | गैर-प्रवासी (Non-Migrants) | सऊदी से लौटे प्रवासी (Saudi Returnees) |
|---|---|---|
| लैंगिक दृष्टिकोण | उदार और प्रगतिशील | अत्यधिक रूढ़िवादी |
| हिंसा के प्रति नजरिया | कम सहनशीलता | उच्च रूढ़िवादिता (3 Standard Deviations) |
| निर्णय प्रक्रिया | समान भागीदारी | पितृसत्तात्मक झुकाव |
Frequently Asked Questions
1. विश्व बैंक के अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष क्या है?
मुख्य निष्कर्ष यह है कि सऊदी अरब से लौटने वाले केरल के पुरुषों में लैंगिक मानदंडों और महिलाओं के प्रति व्यवहार में काफी अधिक रूढ़िवादिता देखी गई है।
2. शशि थरूर ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
थरूर ने इसे 'परेशान करने वाली रिपोर्ट' बताया और मुस्लिम समुदाय के भीतर इस विषय पर गंभीर आत्मनिरीक्षण और चर्चा की आवश्यकता जताई।