पीएमके नेता अन्बुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से परिवारों को राहत देने के लिए छह महीने तक राशन की दुकानों के माध्यम से 2 किलो अतिरिक्त चीनी प्रदान करने का आग्रह किया है।
- चीनी की कीमतों में ₹20-25 प्रति किलो की वृद्धि हुई है।
- अन्बुमणि रामदास ने छह महीने के लिए 2 किलो अतिरिक्त चीनी की मांग की है।
- तमिलनाडु में गन्ने की खेती के रकबे में भारी गिरावट आई है।
- गन्ना खरीद मूल्य को ₹3,383 से बढ़ाकर ₹5,000 करने की मांग की गई है।
तमिलनाडु में चीनी की कीमतों में अचानक हुई भारी वृद्धि ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। इस संकट को देखते हुए, पार्टी एमके (PMK) के प्रमुख अन्बुमणि रामदास ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि उपभोक्ताओं को कीमतों के बढ़ते बोझ से बचाने के लिए अगले छह महीनों तक राशन की दुकानों (Fair-Price Shops) के माध्यम से प्रत्येक परिवार कार्ड पर 2 किलो अतिरिक्त चीनी प्रदान की जाए।
रामदास ने वर्तमान बाजार स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तमिलनाडु में चीनी की कीमतें हाल के दिनों में ₹20 से ₹25 प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं। वर्तमान में चीनी ₹75-80 प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है, और व्यापारियों का अनुमान है कि दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान यह आंकड़ा ₹100 प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकता है।
गन्ने की खेती में संकट और उत्पादन में गिरावट
चीनी की कीमतों में इस उछाल के पीछे के कारणों का विश्लेषण करते हुए, डॉ. अन्बुमणि ने सीधे तौर पर गन्ने की खेती और उत्पादन में आई कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि तमिलनाडु में गन्ने की खेती के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र वर्ष 2020 से पहले लगभग 15 लाख एकड़ था, जो 2025 तक घटकर मात्र 5 लाख एकड़ रह गया है।
गन्ने की खेती में कमी और बढ़ती लागत ने किसानों को इस फसल से दूर कर दिया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
इस गिरावट का मुख्य कारण अपर्याप्त खरीद मूल्य और खेती की बढ़ती लागत है। रामदास के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गन्ना खरीद मूल्य ₹3,383 प्रति टन है, जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है। उन्होंने मांग की है कि इस मूल्य को बढ़ाकर कम से कम ₹5,000 प्रति टन किया जाना चाहिए ताकि किसान फिर से गन्ने की खेती की ओर आकर्षित हों।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में यह अस्थिरता न केवल मध्यम वर्ग बल्कि निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर रही है। यदि गन्ने की खेती के रकबे में इसी तरह गिरावट जारी रही, तो आने वाले वर्षों में चीनी की आपूर्ति और कीमतें दोनों ही अनियंत्रित हो सकती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु ऐतिहासिक रूप से एक प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य रहा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में सिंचाई की समस्याओं और बाजार में अनिश्चितता के कारण उत्पादन के पैटर्न में भारी बदलाव आया है। यह बदलाव राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी है।
Frequently Asked Questions
1. अन्बुमणि रामदास ने सरकार से क्या मांग की है?
उन्होंने राशन की दुकानों के माध्यम से परिवारों को छह महीने के लिए 2 किलो अतिरिक्त चीनी देने की मांग की है।
2. चीनी की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण तमिलनाडु में गन्ने की खेती के रकबे में भारी कमी और उत्पादन का गिरना है।