भुवनेश्वर के बीजु पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का मूल्य ₹5,000‑₹7,000 करोड़ बताया गया है और सालाना 50 लाख यात्रियों का उपयोग करते हैं। बीजेड ने इस प्रस्ताव को ‘अत्यंत निंदनीय’ कहकर केंद्र सरकार से तुरंत撤回 की मांग की।
- बीजु पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का अनुमानित मूल्य ₹5,000‑₹7,000 करोड़ है।
- 2022‑23 में केंद्र सरकार को इस हवाई अड्डे से ₹238 करोड़ का लाभ हुआ।
- बीजेड ने 50‑साल के निजी लीज़ के खिलाफ कड़ी आवाज़ उठाई।
भुवनेश्वर, 26 अगस्त 2026 – बीजु पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निजी इकाई को लीज़ पर देने की योजना पर ओडिशा की प्रमुख राज्य पार्टी बीजेड ने तीखा विरोध किया। बीजेड के विधायक एवं पूर्व मंत्री दिव्य शंकर मिश्रा ने मंगलवार (25 अगस्त) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रस्ताव ‘अत्यंत निंदनीय’ है।
केन्द्रीय नरेंद्र मोदी सरकार ने इस हवाई अड्डे को कर्नाटक के हुब्बली हवाई अड्डे के साथ मिलाकर निजी क्षेत्र को सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत सौंपने की मंजूरी दी है। मिश्रा ने कहा, “ओडिशा का यह प्रमुख हवाई अड्डा, जो लेजेंडरी नेता बीजु पटनायक के नाम पर है, को निजी हाथों में देना अस्वीकार्य है।”
हवाई अड्डे की आर्थिक शक्ति को नहीं नकारा जा सकता। 2022‑23 में केंद्र सरकार को इस से ₹238 करोड़ का शुद्ध लाभ मिला, और अगले वर्षों में यह लाभ ₹500 करोड़ से अधिक होने की संभावना है। इस आय को निजी इकाई को सौंपने से राज्य की राजस्व क्षमता में गिरावट आ सकती है।
बीजु पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का वार्षिक यात्रियों का आंकड़ा लगभग 50 लाख है, जो इसे भारत के सबसे व्यस्त और लाभदायक हवाई अड्डों में से एक बनाता है। इस कारण, बीजेड ने कहा कि यह हवाई अड्डा ‘सामान्य सरकारी संस्थान नहीं’ है जिसे लाभहीन मानकर लीज़ पर दिया जाता है।
बीजेड ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हवाई अड्डे के विकास एवं विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और ओडिशा के लोग 50‑साल के लीज़ को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल इस आदेश को वापस लेने की मांग की।
हवाई अड्डे के अतिरिक्त टर्मिनल निर्माण और बुनियादी ढाँचे में निवेश करने से लाभ में और वृद्धि हो सकती है, इस पर भी बीजेड ने ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “यदि केंद्र सरकार हवाई अड्डे के विकास में पूंजी निवेश करती है, तो लाभ और भी अधिक होगा।”
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that privatizing a high‑earning airport like Biju Patnaik International could set a precedent for other profitable regional airports, potentially shifting revenue streams away from state governments to private conglomerates.
"हवाई अड्डे की निजीकरण नीति राज्य की वित्तीय स्वायत्तता को कमजोर कर सकती है," कहते हैं अवंतिका सिंह, स्वतंत्र आर्थिक विश्लेषक।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या बीजेड ने इस लीज़ के विरोध में वोटिंग या धरना जैसी कार्रवाई की योजना बनाई है?
उत्तर: बीजेड ने निर्णय के तुरंत बाद एक व्यापक आंदोलन और धारा-भंग की संभावना जताई है, जिसमें सार्वजनिक विरोध और विधायी दबाव शामिल हो सकता है।
प्रश्न 2: यदि हवाई अड्डा निजी हाथों में चला जाए तो यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्वामित्व में सेवा गुणवत्ता सुधार सकती है, परंतु टैरिफ वृद्धि और स्थानीय रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव भी संभव है।