कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की जाति जनगणना प्रश्नावली को 'भ्रामक' बताते हुए इसे बदलने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वर्तमान प्रारूप से डेटा गलत हो सकता है।

  • कांग्रेस ने वर्तमान जाति जनगणना प्रश्नावली को 'भ्रामक' और डेटा के लिए हानिकारक बताया है।
  • राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार से राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के साथ परामर्श करने की मांग की है।
  • कांग्रेस का तर्क है कि 'ओपन-एंडेड' फॉर्मेट से एक ही समुदाय के हजारों अलग-अलग नाम दर्ज हो सकते हैं।

नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जाति जनगणना के प्रारूप पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में मांग की है कि वर्तमान प्रश्नावली को तुरंत रद्द किया जाए और एक नई, मानक प्रक्रिया अपनाई जाए।

कांग्रेस का मुख्य तर्क यह है कि सरकार ने जाति विवरण दर्ज करने के लिए एक 'ओपन-एंडेड' (मुक्त-अंत) प्रारूप अपनाया है। इसका अर्थ है कि उत्तरदाता अपनी जाति का नाम स्वयं लिख सकते हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, भारत में एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उप-जातियों या भाषाई विविधताओं से जाना जाता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी पसंद का नाम लिखता है, तो एक ही समुदाय के हजारों अलग-अलग नाम दर्ज हो जाएंगे, जिससे सटीक डेटा प्राप्त करना असंभव हो जाएगा।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जनगणना का डेटा केवल संख्या नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक-आर्थिक नीतियों की आधारशिला है। यदि जातिगत डेटा गलत या भ्रामक है, तो इसका सीधा असर शिक्षा, रोजगार, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से संबंधित नीतियों पर पड़ेगा। गलत आंकड़ों के कारण पिछड़े, अत्यंत पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को उनका वास्तविक हक मिलने में बाधा आ सकती है।

यदि किसी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या सटीक रूप से दर्ज नहीं की जाती है, तो उसकी स्थिति का कोई भी आकलन त्रुटिपूर्ण होगा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि यह प्रधानमंत्री को लिखा गया तीसरा पत्र है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने वर्तमान प्रक्रिया को एक 'वाइटवॉश' (सफेदपोश कार्रवाई) करार दिया है। कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि सरकार को बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षणों की तर्ज पर काम करना चाहिए, जहाँ एक मानक सूची का उपयोग किया गया था।

ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना

भारत में जातिगत डेटा का संग्रह हमेशा से एक संवेदनशील और जटिल मुद्दा रहा है। कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि सरकार को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए उपयोग की जाने वाली पद्धति को ही अन्य जातियों के लिए भी अपनाना चाहिए।

विशेषतावर्तमान प्रस्तावित प्रारूपकांग्रेस का प्रस्तावित प्रारूप
प्रारूप का प्रकारओपन-एंडेड (स्वतंत्र लेखन)मानकीकृत सूची (विकल्प आधारित)
डेटा सटीकताकम (नामों में भिन्नता की संभावना)उच्च (समान नाम का उपयोग)
उदाहरण मॉडल-बिहार और तेलंगाना मॉडल

कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार मौजूदा रिकॉर्ड, जैसे सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) की सूची और भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India) के डेटा का उपयोग करके एक व्यापक सूची तैयार करे।

Did You Know?: बिहार के हालिया जाति सर्वेक्षण ने राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना और आरक्षण नीतियों पर व्यापक बहस छेड़ दी थी।

Frequently Asked Questions

1. कांग्रेस ने प्रश्नावली को 'भ्रामक' क्यों कहा है?
क्योंकि खुले प्रारूप में एक ही जाति के अलग-अलग नाम दर्ज होने से डेटा का विश्लेषण करना कठिन हो जाएगा।

2. कांग्रेस ने सरकार को क्या समाधान सुझाया है?
कांग्रेस ने सुझाव दिया है कि एक मानक जाति सूची प्रदान की जानी चाहिए जिससे लोग अपनी जाति का चयन कर सकें।