आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गोवा में केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल मिश्रण नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस ईंधन से वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और इंजन को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
- E20 ईंधन के कारण वाहनों के माइलेज में 30-40% तक की गिरावट की आशंका।
- इंजन के महत्वपूर्ण पुर्जों जैसे थ्रॉटल बॉडी और इंजेक्टरों को नुकसान पहुँचने के दावे।
- चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल बनाने से देश में चीनी की कीमतों में वृद्धि।
- केजरीवाल का आरोप कि वाहन निर्माता कंपनियां दबाव में खुलकर नहीं बोल पा रही हैं।
गोवा के पणजी में आयोजित आम आदमी पार्टी (AAP) के टाउन हॉल में, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी E20 इथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। इस कार्यक्रम में केवल राजनीतिक बहस ही नहीं हुई, बल्कि उन आम नागरिकों की पीड़ा भी सामने आई जो इस नीति के सीधे शिकार हो रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान, बेनाउलिम के एक सुपरबाइक वर्कशॉप के मालिक और मैकेनिकल इंजीनियर आरिफ अहमद ने मंच पर एक 'थ्रॉटल बॉडी' दिखाते हुए बताया कि कैसे E20 पेट्रोल के कारण मोटरसाइकिलों के इंजन में तकनीकी खराबी आ रही है। उन्होंने बताया कि इथेनॉल के कारण इंजन के अंदर रबर ओ-रिंग्स और इंजेक्टर प्रभावित हो रहे हैं, जिससे सफेद पाउडर जैसा जमाव हो रहा है।
क्यों चिंताजनक है यह स्थिति?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट भी बन सकती है। गोवा जैसे राज्यों में, जहाँ वाहनों का घनत्व बहुत अधिक है (87% परिवारों के पास दोपहिया वाहन हैं), वहां इस नीति का प्रभाव बहुत गहरा है। यदि माइलेज में 30 से 40 प्रतिशत की कमी आती है, तो मध्यम वर्ग और डिलीवरी एजेंटों जैसे कामगारों पर ईंधन का बोझ अत्यधिक बढ़ जाएगा।
ईंधन में इथेनॉल की बढ़ती मात्रा बिना उचित इंजन अनुकूलन के वाहन के जीवनकाल को गंभीर रूप से कम कर सकती है।
केजरीवाल ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि उन्होंने 29 ऑटोमोबाइल निर्माताओं को पत्र लिखकर पूछा कि क्या उनके पुराने वाहन (2023 से पहले के) E20 के अनुकूल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां डर के मारे खुलकर नहीं बोल पा रही हैं क्योंकि उन्हें जांच एजेंसियों (ED, CBI) का भय है।
चीनी संकट और आर्थिक प्रभाव
केजरीवाल ने केवल वाहनों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने गन्ने के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गन्ने का उपयोग इथेनॉल बनाने में अधिक करने से देश में चीनी की कमी हो रही है, जिससे चीनी की कीमतें एक महीने में ही 30 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई हैं। इससे न केवल आम जनता पर बोझ बढ़ रहा है, बल्कि भारत को चीनी आयात पर निर्भर होना पड़ सकता है, जो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. E20 ईंधन क्या है?
E20 का अर्थ है पेट्रोल में 20% इथेनॉल का मिश्रण।
2. क्या यह पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित है?
विशेषज्ञों और केजरीवाल के अनुसार, 2023 से पहले के कई वाहनों के इंजन और पुर्जे इस मिश्रण के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते हैं।