टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला दलबदल विरोधी कानून के तहत सांसदों की अयोग्यता से जुड़ा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है।
- अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से अयोग्यता पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी।
- बागी सांसद बंगाल में हार के बाद एनसीपीआई (NCPI) के साथ जा चुके हैं।
- सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने सांसदों से जवाब मांगा है।
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची राजनीतिक उथल-पुथल अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज तक पहुंच गई है। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह मामला न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति बल्कि भारतीय संसदीय लोकतंत्र की स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़कर त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया। अभिषेक बनर्जी का तर्क है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीते थे, इसलिए किसी अन्य दल में शामिल होना 'दलबदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) का सीधा उल्लंघन है। बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस मामले में त्वरित निर्णय लेने की मांग की थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। हालांकि, कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और महासचिव को भी नोटिस जारी करने की बात कही गई थी। अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा।
दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की प्रक्रिया में देरी अक्सर राजनीतिक अस्थिरता का कारण बनती है, जिसे अब न्यायिक हस्तक्षेप से सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला भारतीय राजनीति में 'दल-बदल' की प्रवृत्ति और संवैधानिक मर्यादाओं के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि ये सांसद अयोग्य घोषित किए जाते हैं, तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ी क्षति होगी और बंगाल की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।
तुलना: शिवसेना मामला बनाम टीएमसी मामला
| विशेषता | शिवसेना (UBT) मामला | TMC मामला |
|---|---|---|
| मुख्य मुद्दा | एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होना | NCPI के साथ विलय |
| सांसकों की संख्या | 6 सांसद | 20 सांसद |
| वर्तमान स्थिति | सुनवाई जारी (जस्टिस पीए नरसिम्हा) | नोटिस जारी (सीजेआई सूर्यकांत) |
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया है कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता की कार्यवाही में की जा रही देरी संविधान की भावना के विरुद्ध है। उन्होंने 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से भी मुलाकात की थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम न निकलने पर उन्हें न्यायपालिका की शरण लेनी पड़ी।
Frequently Asked Questions
1. कौन से प्रमुख नेता नोटिस के दायरे में हैं?
सायोनी घोष, यूसुफ पठान, काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय जैसे प्रमुख नेता इस नोटिस के दायरे में हैं।
2. बागी सांसद किनके साथ शामिल हुए हैं?
ये सांसद त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जुड़ गए हैं।