तमिलनाडु एसोसिएशन फॉर द राइट्स ऑफ ऑल टाइप्स ऑफ डिफेरेन्टली एबल्ड एंड केयरगिवर्स (TARATDAC) ने मदुरै में प्रदर्शन कर मासिक वित्तीय सहायता को तीन गुना करने और लंबित आवेदनों को तुरंत निपटाने की मांग की है।

  • मासिक वित्तीय सहायता को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर ₹6,000 करने की मांग।
  • दो साल से लंबित सहायता आदेशों के बैकलॉग को तुरंत समाप्त करने का आग्रह।
  • कल्याण कोष का प्रबंधन राजस्व विभाग से हटाकर समर्पित दिव्यांग कल्याण विभाग को सौंपने की मांग।
  • सरकारी बसों में दिव्यांगों के लिए सार्वभौमिक मुफ्त यात्रा अधिकार की मांग।

मदुरै जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने तमिलनाडु एसोसिएशन फॉर द राइट्स ऑफ ऑल टाइप्स ऑफ डिफेरेन्टली एबल्ड एंड केयरगिवर्स (TARATDAC) के सदस्यों ने एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य अध्यक्ष विल्सन ने किया, जिसमें राज्य के दिव्यांगजनों के लिए कल्याणकारी उपायों में व्यापक सुधार की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मासिक वित्तीय सहायता को तीन गुना करके ₹6,000 करने की है। विल्सन ने सरकार की निष्क्रियता पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से सहायता राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश ₹15,000 तक की सहायता प्रदान करते हैं, जबकि तमिलनाडु में पर्याप्त समर्थन की कमी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिव्यांगों के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। यदि सरकार इन मांगों को नजरअंदाज करती है, तो यह राज्य के सामाजिक कल्याण के दावों पर सवाल खड़े कर सकता है।

"जब सरकार भ्रष्टाचार उजागर करने वाले अधिकारियों को दंडित करती है, तो सामाजिक न्याय की बात करना बेमानी हो जाता है।"

एसोसिएशन ने सरकारी बसों में दिव्यांगों के लिए मुफ्त यात्रा के अधिकार की भी मांग की है, जैसा कि महिलाओं के लिए लागू किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने Dindigul जिले के दिव्यांग कल्याण अधिकारी (DDRO) के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की कड़ी आलोचना की, जिन्होंने एक एनजीओ के तहत ₹6.6 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश किया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में दिव्यांगों के अधिकारों के लिए समय-समय पर संघर्ष होते रहे हैं। 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act) के बावजूद, कार्यान्वयन और वित्तीय सहायता के वितरण में प्रशासनिक देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे कई लाभार्थियों को उनके हक से वंचित रहना पड़ता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: TARATDAC की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: मुख्य मांग मासिक सहायता को ₹6,000 करना और लंबित आवेदनों को जल्द से जल्द निपटाना है।

प्रश्न 2: प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: इस प्रदर्शन का नेतृत्व TARATDAC के राज्य अध्यक्ष विल्सन ने किया।

Did You Know?: आंध्र प्रदेश जैसे कुछ भारतीय राज्य दिव्यांगों को तमिलनाडु की तुलना में काफी अधिक मासिक पेंशन प्रदान करते हैं।