AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे इस्लाम पर हमला करार दिया है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और वंदे मातरम के विवाद पर भी सरकार को घेरा।

  • ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब प्रतिबंध संबंधी फैसले को असंवैधानिक बताया।
  • उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रथाओं की 'अनिवार्यता' तय करने का अधिकार अदालतों के पास नहीं होना चाहिए।
  • समान नागरिक संहिता (UCC) पर उन्होंने कहा कि 'एकरूपता' का अर्थ 'समानता' नहीं होता।
  • वंदे मातरम के विवाद पर उन्होंने गांधी और टैगोर के ऐतिहासिक दृष्टिकोण का हवाला दिया।

हैदराबाद के सांसद और AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस हालिया फैसले पर तीखा हमला बोला है, जिसमें एक मुस्लिम छात्रा को स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। ओवैसी ने इस निर्णय को सीधे तौर पर 'इस्लाम पर हमला' करार दिया है।

हैदराबाद में 'जल्सा-ए-रहमदुल-लिल-आमीन' कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए, ओवैसी ने सवाल उठाया, "आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि इस्लाम में क्या अनिवार्य है?" उन्होंने तर्क दिया कि अदालत का यह रुख संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 के विरुद्ध है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में आदेश सुरक्षित रखा था, उसी तरह धार्मिक प्रथाओं की व्याख्या के मामले में सावधानी बरती जानी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ओवैसी का यह बयान धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। यह मुद्दा केवल पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस व्यापक बहस का हिस्सा है कि क्या राज्य व्यक्तिगत धार्मिक पहचान में हस्तक्षेप कर सकता है।

"धार्मिक प्रथाओं की अनिवार्यता तय करने का अधिकार राज्य या अदालत के पास नहीं, बल्कि आस्था रखने वालों के पास होना चाहिए।"

ओवैसी ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किए जा रहे उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि 'एकरूपता' (Uniformity) और 'समानता' (Equality) के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि मुस्लिम समुदाय पर हिंदू व्यक्तिगत कानूनों को क्यों थोपा जाना चाहिए।

वंदे मातरम के विवाद पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए, ओवैसी ने कहा कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस का मानना था कि गीत की केवल पहली दो पंक्तियों का गान किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वे इन महान स्वतंत्रता सेनानियों से अधिक बुद्धिमान हैं।

अंत में, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मौलाना मोहम्मद अली जौहर पर दिए गए बयानों का खंडन किया और जौहर के महान राजनीतिक योगदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।

Frequently Asked Questions

1. ओवैसी ने हाईकोर्ट के फैसले को क्या कहा?
ओवैसी ने इसे इस्लाम पर हमला और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

2. UCC पर ओवैसी का क्या तर्क है?
उनका कहना है कि धार्मिक एकरूपता थोपना समानता सुनिश्चित करना नहीं है।

Did You Know?: मौलाना मोहम्मद अली जौहर एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने खिलाफत आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।