केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कंगना रनौत और कृति सानन के बीच हालिया विवाद पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ केवल अपनी बात कहना नहीं, बल्कि दूसरों की असहमति को स्वीकार करना भी है। उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा और मनुस्मृति पर चल रही बहस पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

  • किरेन रिजिजू ने कंगना रनौत के कृति सानन की आलोचना करने के अधिकार का समर्थन किया।
  • उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी में दूसरों से असहमत होने का अधिकार भी शामिल है।
  • प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की।
  • स्पष्ट किया कि भारत का शासन संविधान से चलता है, मनुस्मृति से नहीं।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में अभिनेत्री कंगना रनौत और कृति सानन के बीच हुए विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। कंगना रनौत ने एक राखी विज्ञापन में कृति सानन की वेशभूषा की आलोचना की थी, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी। रिजिजू ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, तो दूसरों को उस पर असहमति जताने से क्यों रोका जा सकता है?

रिजिजू ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में विचारों का आदान-प्रदान दोनों तरफ से होना चाहिए। उन्होंने कहा, "यदि आपके पास अपनी पसंद के अनुसार चीजें व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, तो आप दूसरों को असहमति जताने या विरोध करने से क्यों रोक रहे हैं?" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक मंत्री के रूप में वह सांसदों को संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में मार्गदर्शन दे सकते हैं, लेकिन उनके निजी विचारों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल दो अभिनेत्रियों के बीच का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' की सीमाओं और सामाजिक मानदंडों के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यह बहस इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या डिजिटल युग में सेलिब्रिटी विवादों का राजनीतिकरण हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों पर बात करते हुए, रिजिजू ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से उन टिप्पणियों की निंदा की जो प्रधानमंत्री की दिवंगत माता पर केंद्रित थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री के प्रति ऐसी भाषा का प्रयोग करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध और आलोचना करना पूरी तरह से वैध है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एकतरफा नहीं हो सकती; इसमें विरोध करने और असहमति जताने का अधिकार भी समान रूप से निहित है।

मनुस्मृति पर चल रही बहस के दौरान, रिजिजू ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक बिंदु रखा। उन्होंने कहा कि भारत का शासन संविधान द्वारा चलाया जाता है, न कि किसी धार्मिक ग्रंथ द्वारा। उन्होंने तर्क दिया कि किसी धार्मिक ग्रंथ के कुछ हिस्सों का विरोध करना किसी को 'अति-धार्मिक' या 'विरोधी' नहीं बनाता। उन्होंने हिंदू धर्म को एक उदार धर्म बताया जो लोगों को अपनी आस्था बदलने की अनुमति देता है।

अंत में, उन्होंने राष्ट्र की अखंडता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब देश को तोड़ने या अलगाववाद की बात करना नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भारत की एकता के खिलाफ हिंसा या अलगाववाद का समर्थन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

Did You Know?: भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जो किसी भी धार्मिक ग्रंथ के बजाय देश के शासन का आधार है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: किरेन रिजिजू ने कंगना और कृति के विवाद पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में दूसरों के विचारों से असहमत होने का अधिकार भी शामिल है।

प्रश्न 2: क्या भारत मनुस्मृति के आधार पर चलता है?
उत्तर: नहीं, रिजिजू के अनुसार भारत का शासन पूरी तरह से संविधान द्वारा संचालित होता है।