पुने में स्थित सेना पैरालिम्पिक नोड ने घायल सैनिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले एथलीट्स में बदला है। इस नोड की सफलता का कारण विशेष प्रशिक्षण, सामुदायिक समर्थन और निरंतर स्काउटिंग है।

  • सेना पैरालिम्पिक नोड ने 2024 पैरालिम्पिक में कांस्य पदक जीता।
  • नोड का लक्ष्य घायल सैनिकों को खेल के माध्यम से नई दिशा देना है।
  • मुख्य कोऑर्डिनेटर लफ्टनंट कर्नल दलजीत सिंह इस पहल के पीछे हैं।

परिचय

पुने के सेना स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में स्थित पैरालिम्पिक नोड, पिछले दशक से घायल सैनिकों को उच्च‑स्तरीय खेल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। इस केंद्र ने कई अंतरराष्ट्रीय पदकों की गिनती में अपना नाम दर्ज करवा दिया है, जिसमें 2024 पैरालिम्पिक, पेरिस में हाकातो सेमा का कांस्य पदक शामिल है।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

2017 में स्थापित यह नोड, कोरनल (रिटायर्ड) गौरव दत्ता की पहल पर बना, जिन्होंने स्वयं 2001 में माइन विस्फोट से बाएँ पैर को खो दिया था। दत्ता ने समझा कि खेल ही शारीरिक चोटों के बाद मानसिक पुनर्स्थापना का सबसे प्रभावी माध्यम हो सकता है। इस विचार ने नोड को एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र के रूप में आकार दिया।

प्रशिक्षण मॉडल और चयन प्रक्रिया

नोड केवल दो मुख्य संस्थानों—आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर (ALC) और स्पाइनल कॉर्ड इन्जरी सेंटर (SCIC)—से संभावित एथलीट्स की पहचान करता है। हर हफ़्ते, कोऑर्डिनेटर दलजीत सिंह और कोचेज़ इन केंद्रों का दौरा करके संभावित प्रतिभाओं को स्काउट करते हैं। चयन के बाद, एथलीट्स को विभिन्न शहरों में स्थित विशेष सुविधाओं में वितरित किया जाता है: पुने (ट्रैक‑एंड‑फ़ील्ड, तैराकी), म्हो (शूटर), बेंगलुरु (टैक्वांडो) और भोपाल (कैनोइंग)।

मुख्य उपलब्धियां

हाकातो सेमा ने 2024 पैरालिम्पिक में F57 शॉट पुट में कांस्य पदक जीतकर नोड की प्रतिष्ठा को बढ़ाया। उसी वर्ष, सोमन राणा ने ग्लासगो में कोमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण और शुभम जुयाल ने रजत पदक जीता। इन जीतों ने नोड को 2025 के राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार (Rashtriya Khel Protsahan Puraskar) से सम्मानित किया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2026 में सौंपा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the Army Paralympic Node not only rehabilitates wounded soldiers but also projects India’s soft power on global sporting platforms. The model demonstrates how institutional support can turn personal tragedy into national pride.

"खेल ही वह मंच है जहाँ शारीरिक बाधाएँ आत्मविश्वास में बदल जाती हैं," कहते हैं खेल मनोवैज्ञानिक डॉ. रीता सिंह।

भविष्य की दिशा

नोड का अगला लक्ष्य 2028 एशियाई पैरालिम्पिक में अधिक पदक जीतना और साथ ही अधिक सैनिकों को शामिल करना है। इसके लिए अतिरिक्त फंडिंग, उन्नत बायो‑मैकेनिकल प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय कोचिंग साझेदारियों की योजना बनाई गई है।

Did You Know?: भारत के पहले पैरालिम्पिक स्वर्ण पदक विजेता मोहम्मद अली ने भी इस नोड के शुरुआती प्रशिक्षुओं में से एक थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या कोई भी सेना का सदस्य पैरालिम्पिक नोड में शामिल हो सकता है?

उत्तर: केवल वे सैनिक जो स्थायी शारीरिक चोटों से ग्रस्त हों और जिनके पास न्यूनतम शारीरिक क्षमता मानक हों, उन्हें चयनित किया जाता है।

प्रश्न 2: नोड के एथलीट्स को कौन-सी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं?

उत्तर: विश्व‑स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएँ, प्रोस्थेटिक सपोर्ट, मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।