कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर मतदाता सूची में 1.08 करोड़ मतदाताओं के नाम संदिग्ध होने पर आपत्ति जताई है और दावा करने के लिए अधिक समय की मांग की है।
- कर्नाटक के 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1.08 करोड़ को 'ASDDO' श्रेणी में चिह्नित किया गया है।
- बेंगलुरु में अकेले 46.88 लाख मतदाताओं के नाम पर संकट मंडरा रहा है।
- मुख्यमंत्री ने 'तार्किक विसंगतियों' के समाधान के लिए 45 दिनों से अधिक का समय मांगा है।
- चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग (EC) के समक्ष एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए राज्य के 1.08 करोड़ मतदाताओं के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची के मसौदे के अनुसार, राज्य के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से एक बड़ी संख्या को 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट और अन्य' (ASDDO) श्रेणी में डाल दिया गया है।
शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे एक औपचारिक पत्र में तर्क दिया कि इस प्रक्रिया में इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को बाहर करना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से बेंगलुरु का उल्लेख किया, जहाँ अकेले 46.88 लाख मतदाता इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि इन मतदाताओं ने समय पर अपने दावे प्रस्तुत नहीं किए, तो लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी विसंगति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि आगामी चुनावों में बड़े पैमाने पर मतदाता बहिष्कार का कारण भी बन सकती है। यदि वास्तविक मतदाता, विशेष रूप से प्रवासी कामगार और बुजुर्ग, तकनीकी खामियों के कारण सूची से बाहर हो जाते हैं, तो यह चुनावी अखंडता पर सवाल उठाएगा।
"हमारा उद्देश्य एक ऐसी मतदाता सूची होनी चाहिए जिस पर कर्नाटक के लोग भरोसा कर सकें, जहाँ हर पात्र नागरिक शामिल हो और किसी को भी पर्याप्त समय या जानकारी के अभाव में मताधिकार से वंचित न किया जाए।" - डीके शिवकुमार
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 43.8 लाख मतदाताओं को 'तार्किक विसंगतियों' (Logical Discrepancies) के कारण नोटिस जारी किए जाने वाले हैं। ये विसंगतियाँ मुख्य रूप से 2002 के मतदाता रोल डेटा के साथ मिलान न होने के कारण उत्पन्न हुई हैं। शिवकुमार ने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान में दिया जा रहा समय बहुत कम है, जिससे कामकाजी लोगों और बुजुर्गों के लिए दस्तावेज़ जुटाना कठिन होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मतदाता सूची का संशोधन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) तब किया जाता है जब बड़े पैमाने पर डेटा शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है। कर्नाटक में वर्तमान प्रक्रिया 2002 के पुराने डेटा के साथ नए डेटा के मिलान पर आधारित है, जिससे कई नए और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम संकट में पड़ गए हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ASDDO श्रेणी का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), डुप्लिकेट (Duplicate) और अन्य (Others)।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री ने क्या मांग की है?
उत्तर: मुख्यमंत्री ने दावों और आपत्तियों को दर्ज करने के लिए समय सीमा बढ़ाने और विसंगतियों के समाधान के लिए कम से कम 3-4 सप्ताह का समय देने की मांग की है।