द डेली वायर के सह-संस्थापक बेन शालो की नई फिल्म 'रन हाइड फाइट: इन्फिडल्स' दशकों पुराने इस्लामोफोबिक रूढ़ियों को फिर से जीवित कर रही है। यह फिल्म गाजा के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को चरमपंथी के रूप में चित्रित कर एक खतरनाक नैरेटिव सेट कर रही है।

  • बेन शालो की नई फिल्म 'रन हाइड फाइट: इन्फिडल्स' दशकों पुराने मुस्लिम विरोधी नैरेटिव का उपयोग करती है।
  • फिल्म में गाजा समर्थक छात्र विरोध प्रदर्शनों को 'इस्लामी आतंकवाद' के रूप में दिखाया गया है।
  • यह फिल्म हॉलीवुड के पुराने और हानिकारक रूढ़ियों को आधुनिक रंग में पेश करती है।

अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार और The Daily Wire के सह-संस्थापक बेन शालो ने अपनी नई फिल्म, 'Run Hide Fight: Infidels' की घोषणा की है। शालो का दावा है कि हॉलीवुड पिछले तीन दशकों से 'कट्टरपंथी इस्लाम के खतरे' की कहानी बताने से बचता रहा है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक और पक्षपाती बता रहे हैं।

यह कोई नई बात नहीं है। दशकों से हॉलीवुड ने अरब और मुस्लिम पहचान को हिंसा, बर्बरता और खतरे के साथ जोड़कर दिखाया है। 2003 में जैक शेहीन की पुस्तक 'Reel Bad Arabs' ने खुलासा किया था कि कैसे फिल्मों ने मुस्लिम पात्रों को केवल आतंकवादी या डरावने रूप में पेश किया है। 'ट्रू लाइज़' (1994) से लेकर 'अमेरिकन स्नाइपर' (2015) तक, मीडिया ने लगातार एक ही तरह का नैरेटिव परोसा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह का मीडिया नैरेटिव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके वास्तविक दुनिया में गंभीर परिणाम होते हैं। जब मीडिया किसी विशेष समुदाय को 'खतरा' घोषित करता है, तो यह उस समुदाय के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देता है। हाल ही में सैन डिएगो के एक इस्लामिक सेंटर पर हुआ हमला इसी तरह की नफरत का परिणाम हो सकता है।

मीडिया द्वारा किसी समुदाय का अपराधीकरण करना समाज में विभाजन और शारीरिक हिंसा की नींव रखता है।

शालो की नई फिल्म इस पुराने ढर्रे को एक आधुनिक मोड़ देने की कोशिश करती है। फिल्म के ट्रेलर के अनुसार, कहानी एक कॉलेज कैंपस के इर्द-गिर्द घूमती है जहाँ 'कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी' कब्जा कर लेते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि फिल्म में गाजा एकजुटता विरोध प्रदर्शनों (Gaza solidarity encampments) की फुटेज को ISIS और 9/11 की फुटेज के साथ जोड़कर दिखाया गया है, जिससे छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को आतंकवाद से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यह फिल्म ऐसे समय में आ रही है जब अमेरिका में मुस्लिम विरोधी भावनाएं चरम पर हैं और गाजा में हो रहे संघर्ष के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। यह फिल्म केवल एक सिनेमाई कृति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार प्रतीत होती है जो मौजूदा विरोध आंदोलनों को बदनाम करने के लिए तैयार की गई है।

Did You Know?: जैक शेहीन ने अपनी रिसर्च में पाया था कि हॉलीवुड की 900 से अधिक फिल्मों में अरबों को मुख्य रूप से विलेन के रूप में दिखाया गया है।

Frequently Asked Questions

1. बेन शालो कौन हैं?
बेन शालो एक प्रमुख अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार और 'द डेली वायर' के सह-संस्थापक हैं।

2. फिल्म का मुख्य विवाद क्या है?
फिल्म पर आरोप है कि यह गाजा के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को इस्लामी आतंकवादी बताकर नफरत फैला रही है।