तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर को मेट्टूर बांध के स्लुइस गेट खोलने की घोषणा करेंगे। यह निर्णय कावेरी डेल्टा के किसानों की मांग और सिंचाई की जरूरतों को देखते हुए लिया गया है।

  • मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर को मेट्टूर बांध के गेट खोलेंगे।
  • पानी को 45 दिनों की अवधि के लिए छोड़ा जाएगा।
  • कावेरी जल विवाद और कम भंडारण के बावजूद यह निर्णय लिया गया है।
  • डेल्टा जिलों में कृषि तैयारियों के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 1 सितंबर को मेट्टूर बांध (स्टेनली जलाशय) के स्लुइस गेट खोले जाएंगे। राज्य सरकार के अनुसार, पानी को अगले 45 दिनों तक जारी रखा जाएगा। यह कदम कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग और सिंचाई सत्र की शुरुआत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मेट्टूर बांध, जो सालेम में स्थित है, कावेरी डेल्टा जिलों की जीवन रेखा माना जाता है। इस वर्ष सिंचाई सत्र की शुरुआत में देरी हुई क्योंकि जून के महीने में जल स्तर कम होने के कारण पानी नहीं छोड़ा जा सका था। अब, सरकार ने किसानों और जनता के व्यापक अनुरोधों के बाद यह निर्णय लिया है, हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कावेरी कैचमेंट क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेट्टूर बांध का जल स्तर और पानी का वितरण न केवल तमिलनाडु की कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि कर्नाटक के साथ चल रहे अंतरराज्यीय जल विवाद को भी हवा देता है। यदि पानी का प्रवाह सही समय पर नहीं होता है, तो तंजावुर और नागपट्टिनम जैसे जिलों में फसल चक्र पूरी तरह से बिगड़ सकता है।

मेट्टूर बांध का समय पर खुलना कावेरी डेल्टा के कृषि भविष्य के लिए एक निर्णायक मोड़ है।

ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने स्पष्ट किया कि 2026-2027 सिंचाई वर्ष की शुरुआत में बांध में उपयोगी पानी का भंडारण केवल 41.223 TMC था। उन्होंने यह भी बताया कि कर्नाटक के बांधों से पर्याप्त पानी न मिलने के कारण निरंतर सिंचाई आपूर्ति चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन पीने के पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है।

तमिलनाडु सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से अपने कानूनी अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, कर्नाटक को बिलिगंडुलु में निर्दिष्ट प्रवाह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे तमिलनाडु के जल अधिकारों को मजबूती मिली है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मेट्टूर बांध का निर्माण कावेरी नदी पर किया गया था और यह दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में से एक है। दशकों से, कावेरी के पानी का बंटवारा तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है, जो अक्सर अदालती लड़ाइयों और क्षेत्रीय विरोध प्रदर्शनों का कारण बनता है।

Did You Know?: मेट्टूर बांध को 'स्टेनली जलाशय' के नाम से भी जाना जाता है और यह कावेरी डेल्टा की सिंचाई का मुख्य आधार है।
विवरणवर्तमान स्थिति
वर्तमान जल स्तर88.84 फीट
कुल गहराई120 फीट
उपयोगी भंडारण41.223 TMC

Frequently Asked Questions

1. मेट्टूर बांध के गेट कब खोले जाएंगे?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर को गेट खोलने की योजना बना रहे हैं।

2. पानी कितने दिनों तक छोड़ा जाएगा?
सरकार के अनुसार, पानी को 45 दिनों की अवधि के लिए छोड़ा जाएगा।