केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के संकेत मिलने के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सीमांकन (Delimitation) पर सर्वदलीय बैठक की मांग दोहराई है।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सीमांकन प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की।
  • केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के विशेष सत्र की संभावना के संकेत दिए हैं।
  • कांग्रेस ने मांग की है कि सीमांकन से पहले राजनीतिक दलों और राज्यों को अध्ययन के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
  • विवाद का मुख्य केंद्र सीमांकन और महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा है।

भारतीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। संसद के मानसून सत्र के बिना प्रोलोग (prorogue) किए सस्पेंड होने के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक नया पत्र लिखकर सीमांकन (Delimitation) के संवेदनशील मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की पुरजोर मांग की है।

यह घटनाक्रम केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक हालिया साक्षात्कार के तुरंत बाद आया है। रिजिजू ने 'इंडिया टुडे' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में संकेत दिया कि संसद का एक और सत्र बुलाया जा सकता है, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि करने से इनकार कर दिया। रिजिजू ने कहा कि यदि सदन को औपचारिक रूप से प्रोलोग नहीं किया गया है, तो सरकार राष्ट्रपति से दोबारा सत्र बुलाने का अनुरोध कर सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल विधायी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक भविष्य के पुनर्गठन का है। सीमांकन का सीधा प्रभाव राज्यों के प्रतिनिधित्व और लोकसभा की सीटों के आवंटन पर पड़ेगा, जो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक बड़े राजनीतिक असंतुलन का कारण बन सकता है।

सीमांकन जैसे संवेदनशील विषय पर बिना व्यापक सहमति के कोई भी कदम देश के संघीय ढांचे में तनाव पैदा कर सकता है।

खड़गे ने अपने पत्र में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अप्रैल 2026 की तरह 'बुलडोजिंग' (बिना चर्चा के कानून पास करना) करने की कोशिश न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस तीन प्रमुख बिंदुओं पर अडिग है: अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा संख्या (543) बनी रहे, राज्यवार सीटों का वर्तमान आवंटन न बदले, और 2029 के चुनावों से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिले।

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में लाया गया सीमांकन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहे थे। अब सरकार का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

Did You Know?: संसद के सत्र को 'प्रोलोग' (Prorogue) करने का अर्थ है सत्र को समाप्त करना, लेकिन यदि इसे नहीं किया जाता है, तो तकनीकी रूप से सत्र जारी माना जा सकता है जिसे दोबारा बुलाया जा सकता है।

Frequently Asked Questions

1. खड़गे की मुख्य मांग क्या है?
खड़गे ने सीमांकन प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक और राज्यों को अध्ययन के लिए समय देने की मांग की है।

2. किरेन रिजिजू ने क्या संकेत दिया?
रिजिजू ने संकेत दिया कि संसद का एक अन्य सत्र बुलाया जा सकता है, क्योंकि मानसून सत्र को अभी तक औपचारिक रूप से समाप्त (prorogue) नहीं किया गया है।