उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य और एटा के जिलाधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। मंत्री ने आरोप लगाया कि डीएम ने उनके 18 कॉल्स का जवाब नहीं दिया, जिससे प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ।
- मंत्री बेबी रानी मौर्य ने एटा डीएम अरविंद सिंह पर फोन न उठाने का आरोप लगाया।
- मंत्री ने 18 बार कॉल करने के बावजूद जवाब न मिलने पर नाराजगी जाहिर की।
- विवाद के दौरान मंत्री ने डीएम द्वारा दिए गए बुके (गुलदस्ते) को लेने से भी मना कर दिया था।
- घटना कलेक्ट्रेट सभागार में रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान हुई।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ प्रदेश की महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य और जिला प्रशासन के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मंत्री मौर्य ने जिलाधिकारी अरविंद सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया और मंत्री के बार-बार फोन करने के बावजूद उनका फोन नहीं उठाया।
क्या था पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को एटा के कलेक्ट्रेट सभागार में रक्षाबंधन के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मंत्री बेबी रानी मौर्य महिलाओं को साड़ी और मिठाई वितरित करने पहुंची थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब मंत्री ने व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के लिए डीएम को फोन किया। मंत्री के अनुसार, उन्होंने 18 बार कॉल किया, लेकिन जिलाधिकारी ने एक भी कॉल रिसीव नहीं किया।
इस अनदेखी से भड़की मंत्री ने सार्वजनिक रूप से डीएम को फटकार लगाई। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल किया, "क्या प्रोटोकॉल में आप हमसे बड़े हैं? क्या आप हमसे बात नहीं करेंगे?" मंत्री का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान डीएम द्वारा दिए जाने वाले बुके (गुलदस्ते) को लेने से भी इनकार कर दिया, जिससे वहां मौजूद अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच काफी असहज स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, कुछ समय बाद मंत्री ने बुके स्वीकार कर लिया।
BozokMedia विश्लेषण: प्रशासनिक शिष्टाचार बनाम राजनीतिक दबाव
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक ढांचे और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच के तनावपूर्ण संबंधों को भी दर्शाती है। जब एक कैबिनेट मंत्री व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी मांगती है, तो स्थानीय प्रशासन की विफलता न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी कामकाज की सुस्ती को भी उजागर करती है।
प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के बीच संचार का अभाव सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकता है।
गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में मंत्री ने महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस यात्रा योजना के बारे में भी जानकारी साझा की थी। इस विवाद का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश में अक्सर मंत्रियों और नौकरशाहों (IAS अधिकारियों) के बीच प्रोटोकॉल को लेकर विवाद होते रहे हैं। सत्ता और प्रशासन के बीच की यह खींचतान अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सामने आती है, जो राज्य की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
Frequently Asked Questions
1. मंत्री बेबी रानी मौर्य ने डीएम पर क्या आरोप लगाया?
मंत्री ने आरोप लगाया कि डीएम अरविंद सिंह ने व्यवस्थाओं की जानकारी के लिए किए गए उनके 18 फोन कॉल्स का उत्तर नहीं दिया।
2. यह घटना कहाँ और कब हुई?
यह घटना बुधवार को एटा के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महिला कल्याण कार्यक्रम के दौरान हुई।