आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल होने के बाद शांत रहे राघव चड्ढा ने यूपीआई के 10 साल पूरे होने पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने डिजिटल इंडिया की सफलता और यूपीआई के आंकड़ों के माध्यम से देश की आर्थिक प्रगति को रेखांकित किया है।
- यूपीआई के 10 साल पूरे होने पर राघव चड्ढा ने डेटा आधारित विश्लेषण साझा किया।
- वित्त वर्ष 2025-26 तक यूपीआई ट्रांजैक्शन का मूल्य ₹314 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
- भारत का यूपीआई अब दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट पेमेंट सिस्टम बन चुका है।
- चड्ढा ने प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया विजन की सराहना की।
पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, जो हाल ही में राजनीतिक बदलावों के कारण चर्चा में रहे हैं, उन्होंने लंबे समय बाद सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। बुधवार को उन्होंने देश में यूपीआई (Unified Payments Interface) के सफल 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। चड्ढा ने न केवल इस तकनीक की सुगमता की सराहना की, बल्कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते आंकड़ों के माध्यम से इसकी अभूतपूर्व वृद्धि को भी दर्शाया।
चड्ढा ने अपने संदेश की शुरुआत एक बेहद लोकप्रिय वाक्य से की: 'स्कैनर दे दीजिए, यूपीआई कर देता हूं।' उन्होंने तर्क दिया कि एक सफल इंफ्रास्ट्रक्चर वही है जो तकनीक का दिखावा करने के बजाय लोगों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाए। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने नागरिकों, व्यापारियों और धन के बीच के संबंधों को पूरी तरह बदल दिया है।
यूपीआई के 10 वर्षों का सफर: आंकड़ों की नज़र से
राघव चड्ढा ने साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई की विकास यात्रा चौंकाने वाली है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहाँ ट्रांजैक्शन का मूल्य मात्र ₹0.07 लाख करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर ₹314 लाख करोड़ के विशाल स्तर पर पहुंच गया है। ट्रांजैक्शन की संख्या में भी भारी उछाल देखा गया है।
| विवरण | वित्त वर्ष 2016-17 | वित्त वर्ष 2025-26 |
|---|---|---|
| कुल ट्रांजैक्शन मूल्य | ₹0.07 लाख करोड़ | ₹314 लाख करोड़ |
| ट्रांजैक्शन की संख्या | 1.8 करोड़ | 24,161 करोड़ |
| दैनिक औसत (जुलाई 2026) | - | 76.3 करोड़ |
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत ने डिजिटल वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के मामले में वैश्विक मानक स्थापित कर दिए हैं। जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 76.3 करोड़ ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जिनका मूल्य लगभग ₹29.88 लाख करोड़ है।
Why This Matters
यह बदलाव केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं है। यह छोटे व्यापारियों से लेकर छात्रों और बड़े कॉर्पोरेट घरानों तक, समाज के हर वर्ग को सशक्त बना रहा है। यूपीआई ने नकदी पर निर्भरता को कम किया है और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है।
सफल इंफ्रास्ट्रक्चर वो नहीं है, जो टेक्नोलॉजी का दिखावा करे, बल्कि वह है जो प्रतिदिन के जीवन का अंग बन जाए।
चड्ढा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' विजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे तकनीक को अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सकता है। आईएमएफ फिनटेक के अनुसार, मात्रा के आधार पर यूपीआई अब दुनिया का सबसे बड़ा रिटेल फास्ट पेमेंट सिस्टम है।
Historical Background
भारत में यूपीआई को आधिकारिक तौर पर 25 अगस्त, 2016 को लॉन्च किया गया था। एनपीसीआई (NPCI) द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म आज वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन चुका है।
Frequently Asked Questions
1. यूपीआई का जनक किसे माना जाता है?
यूपीआई को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित किया गया है।
2. क्या यूपीआई वैश्विक स्तर पर उपयोग किया जा सकता है?
हाँ, भारत अब कई अन्य देशों के साथ यूपीआई के एकीकरण पर काम कर रहा है।