तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने सदन से हटाए गए (expunged) बयानों को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का वादा किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर अमेरिका और ब्रिटेन की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने की बात कही है।

  • स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने सदन से हटाए गए बयानों को सोशल मीडिया पर साझा करने से रोकने के उपाय खोजने का वादा किया है।
  • डीएमके सदस्य ई.वी. वेलु ने सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर नियंत्रण की मांग की।
  • स्पीकर अमेरिका और ब्रिटेन की विधायी प्रथाओं का अध्ययन कर रहे हैं।
  • सदन की कार्यवाही के दौरान विभागीय सचिवों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आश्वासन देते हुए कहा कि वह उन तरीकों की जांच करेंगे जिनसे सदन की कार्यवाही से हटाए गए (expunged) बयानों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने से रोका जा सके। यह कदम सदन की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

यह मुद्दा तब उठा जब डीएमके सदस्य ई.वी. वेलु ने सदन के विशेषाधिकार के संबंध में दो पत्र सौंपे। श्री वेलु ने तर्क दिया कि जहां प्रिंट मीडिया ने सदन से हटाए गए बयानों को प्रकाशित करने से परहेज किया है, वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे सदन की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल युग में विधायी कार्यवाही का लाइव प्रसारण एक दोधारी तलवार है। जहां यह पारदर्शिता बढ़ाता है, वहीं अनर्गल बयानों का वायरल होना लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। विधानसभा के भीतर की मर्यादा को डिजिटल दुनिया में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

सदन की गरिमा को डिजिटल अराजकता से बचाना आधुनिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

श्री प्रभाकर ने उल्लेख किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं, जहां कार्यवाही का लाइव प्रसारण होने के बावजूद, हटाए गए बयानों को सार्वजनिक नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा, "हम इस प्रथा का अध्ययन कर रहे हैं। मैं विशेषाधिकार समिति को भेजे बिना भी इस मुद्दे पर विचार करूंगा।"

इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष ने विभिन्न विभागों के सचिवों को सलाह दी कि जब उनके विभागों से संबंधित प्रश्न पूछे जाएं, तो वे सदन में उपस्थित रहें। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी प्रश्नकाल के दौरान अधिकारियों की उपस्थिति की परंपरा को याद दिलाया।

सदन में बहस के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि अब विधानसभा की कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जा रहा है और अधिकारी 'वॉर रूम' में मौजूद रहते हैं। हालांकि, डीएमके के अन्य सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि मुख्यमंत्री सदन में नहीं हैं, तो मुख्य सचिव की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए।

Frequently Asked Questions

1. 'Expunged Remarks' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है वे शब्द या बयान जिन्हें सदन के अध्यक्ष द्वारा कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है क्योंकि वे सदन की गरिमा के विरुद्ध होते हैं।

2. क्या सोशल मीडिया पर इन बयानों को पोस्ट करना कानूनी अपराध है?
वर्तमान में यह सदन के विशेषाधिकार और नियमों के दायरे में आता है, जिस पर स्पीकर नए दिशा-निर्देश बनाने पर विचार कर रहे हैं।

Did You Know?: कई विकसित देशों में विधायी कार्यवाही का लाइव प्रसारण होता है, लेकिन नियमों के तहत कुछ संवेदनशील हिस्सों को 'म्यूट' या रिकॉर्ड से हटा दिया जाता है।