चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार द्वारा वार्ड विकास निधि जारी न करने के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि फंड जारी नहीं किया गया, तो वे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।

  • चेन्नई कॉर्पोरेशन काउंसिल की बैठक में DMK, AIADMK, BJP और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों ने राज्य सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
  • पार्षदों ने प्रत्येक वार्ड के लिए ₹60 करोड़ की विशेष विकास निधि की मांग की है।
  • फंड की कमी के कारण सड़कों की मरम्मत, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़े हैं।
  • वार्ड 141 के पार्षद ए. राजा अन्बझगन ने फंड न मिलने पर इस्तीफे की चेतावनी दी है।

चेन्नई: चेन्नई ग्रेटर कॉर्पोरेशन (GCC) की हालिया काउंसिल बैठक में एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जहाँ आमतौर पर विरोधी माने जाने वाले राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार के खिलाफ एक सुर में आवाज उठाई। DMK, AIADMK, BJP, और कांग्रेस जैसे दलों के पार्षदों ने वार्ड विकास निधि (Ward Development Funds) जारी न किए जाने के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की।

DMK के फ्लोर लीडर एन. रामलिंगम ने एक प्रस्ताव पेश करते हुए मांग की कि राज्य सरकार प्रत्येक वार्ड के विकास कार्यों के लिए ₹60 करोड़ की विशेष निधि आवंटित करे। इस दौरान वार्ड 141 के पार्षद ए. राजा अन्बझगन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि विकास निधि जारी नहीं की गई, तो पार्षद अगली काउंसिल बैठक से पहले अपने पदों से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह गतिरोध केवल वित्तीय नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक है। स्थानीय निकायों के पास विकास कार्यों को लागू करने की शक्ति तो है, लेकिन बिना राज्य सरकार के वित्तीय समर्थन के वे केवल कागजी बनकर रह जाते हैं। फंड का यह अभाव बुनियादी ढांचे के पतन और शहरी प्रबंधन के संकट को जन्म दे रहा है।

भाजपा पार्षद उमा आनंदन ने काला रंग पहनकर विरोध जताया और कहा, "हम अपने लिए कारें नहीं मांग रहे हैं, बल्कि परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन मांग रहे हैं। फंड की कमी के कारण हम अंतिम चरण के कार्यों को पूरा करने में असमर्थ हैं।" उन्होंने विशेष रूप से बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी नेटवर्क (Stormwater drain network) की समस्याओं का उल्लेख किया।

फंड का यह संकट स्थानीय लोकतंत्र की कार्यक्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है, जिससे नागरिक सेवाओं में भारी गिरावट आ रही है।

बैठक के दौरान AIADMK पार्षद टी. सत्यनाथन ने कहा कि पिछले चार वर्षों में फंड का वितरण समान रूप से होता था, लेकिन वर्तमान में यह प्रक्रिया बाधित हो गई है। वहीं, CPI और CPI(M) के पार्षदों ने भी इस मांग का पुरजोर समर्थन किया। कुछ पार्षदों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में DMK की संभावित जीत के डर से फंड रोक रही है।

मेयर आर. प्रिया ने स्पष्ट किया कि काउंसिल राज्य सरकार के प्रति अपनी असंतोष व्यक्त करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करेगी। उन्होंने कहा कि यदि अभी फंड जारी नहीं किया गया, तो विकास कार्यों को अगले छह से सात महीनों में पूरा करना असंभव होगा।

Did You Know?: चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) भारत के सबसे पुराने नगर निकायों में से एक है, जो शहर के बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।

Frequently Asked Questions

1. पार्षद किस राशि की मांग कर रहे हैं?
पार्षद प्रत्येक वार्ड के विकास कार्यों के लिए ₹60 करोड़ की विशेष निधि की मांग कर रहे हैं।

2. फंड न मिलने से क्या प्रभाव पड़ रहा है?
सड़कों की मरम्मत, जल निकासी नेटवर्क का निर्माण और बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण नागरिक कार्य रुक गए हैं।