कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने कावेरी जल संकट के कारण डेल्टा जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। पार्टी ने किसानों के लिए ₹30,000 प्रति एकड़ और कृषि श्रमिकों के लिए ₹15,000 राहत राशि की मांग उठाई है।
- सीपीआई ने कावेरी डेल्टा जिलों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।
- किसानों के लिए ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की गई है।
- कृषि श्रमिकों के लिए ₹15,000 की राहत राशि का प्रस्ताव दिया गया है।
- मेट्टूर बांध से समय पर पानी न मिलने से कुरुवई धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है।
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्रों में गहराते जल संकट के बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने मांग की है कि इन जिलों को तत्काल 'सूखाग्रस्त' घोषित किया जाए, क्योंकि मेट्टूर बांध से कावेरी का पानी समय पर न छोड़े जाने के कारण कुरुवई धान की खेती का सीजन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
सीपीआई के अनुसार, पानी की कमी के कारण धान के रकबे में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि जो किसान इस सीजन में भारी नुकसान झेल चुके हैं, उन्हें ₹30,000 प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डेल्टा क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कावेरी के जल प्रवाह पर निर्भर है। यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती है, तो यह संकट न केवल किसानों बल्कि पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार को अस्थिर कर सकता है।
जल संकट केवल कृषि तक सीमित नहीं है, यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने की क्षमता रखता है।
मुआवजे के अलावा, सीपीआई ने कृषि श्रमिकों के लिए भी राहत की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सूखे के कारण श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं, इसलिए उन्हें ₹15,000 की एकमुश्त राहत राशि प्रदान की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने कृषि ऋणों को माफ करने और गांवों में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर कदम उठाने का आह्वान किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कावेरी डेल्टा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से तमिलनाडु का 'चावल का कटोरा' रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में अनियमित मानसून और बांधों से पानी के प्रबंधन में देरी के कारण सिंचाई की समस्याएँ गंभीर हुई हैं, जिससे कुरुवई और मुख्य सीजन की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सीपीआई ने मुआवजे के लिए कितनी राशि की मांग की है?
पार्टी ने किसानों के लिए ₹30,000 प्रति एकड़ और कृषि श्रमिकों के लिए ₹15,000 की मांग की है।
2. सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है?
मेट्टूर बांध से पानी न मिलने के कारण धान की खेती (कुरुवई) को भारी नुकसान हुआ है, जिससे क्षेत्र में सूखा जैसी स्थिति बन गई है।