जेडीएस युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 'Nothing NICE' अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने वेबसाइट nothingnice.net के माध्यम से प्रोजेक्ट से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं।

  • जेडीएस ने NICE प्रोजेक्ट के खिलाफ 'Nothing NICE' नामक नया अभियान शुरू किया।
  • निखिल कुमारस्वामी ने प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार और 1997 के समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया।
  • किसानों को मुआवजा न मिलने और भूमि का निजी उपयोग किए जाने पर सवाल उठाए गए।
  • सरकार से टोल वसूली तुरंत रोकने और प्रोजेक्ट को अपने नियंत्रण में लेने की मांग की गई।

बेंगलुरु में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान, जेडीएस (JD(S)) के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने NICE (नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज) प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 'Nothing NICE' अभियान का शुभारंभ करते हुए आरोप लगाया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन किया गया है।

इस अभियान के हिस्से के रूप में, कुमारस्वामी ने nothingnice.net नामक एक वेबसाइट का भी अनावरण किया। जेडीएस का दावा है कि इस वेबसाइट पर प्रोजेक्ट से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा जारी किया गया आदेश भी शामिल है। यह कदम प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

परियोजना में विफलता और भूमि संबंधी विवाद

निखिल कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि NICE प्रोजेक्ट 1997 में हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क समझौते के तहत की गई कई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के तहत पांच टाउनशिप और 111 किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित थी, लेकिन आज भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है।

भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर हमला बोलते हुए, उन्होंने कहा कि मूल रूप से परिधीय सड़क के लिए 2,193 एकड़ भूमि प्रस्तावित थी, लेकिन इसके बजाय 554 एकड़ अतिरिक्त भूमि ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस भूमि को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए लिया गया था, उसका उपयोग अब रियल एस्टेट और निजी उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

परियोजना के अधूरे होने के बावजूद टोल वसूली करना किसानों और जनता के साथ अन्याय है।

राजनीतिक आरोप और सरकार पर निशाना

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा न केवल बुनियादी ढांचे से जुड़ा है, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़ा हथियार बन गया है। कुमारस्वामी ने वर्तमान राज्य सरकार पर रियल एस्टेट क्षेत्र का पक्ष लेने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'रियल एस्टेट फोरम का सीईओ' करार दिया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि NICE प्रोजेक्ट की शुरुआत एच.डी. देवेगौड़ा के कार्यकाल में हुई थी, लेकिन फ्रेमवर्क समझौता जे.एच. पटेल के समय हुआ था। उन्होंने अपने पिता, पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी को बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट से पूरी तरह निर्दोष बताया।

किसानों के लिए मांगें

जेडीएस ने मांग की है कि सरकार को तुरंत NICE सड़क पर टोल वसूली रोक देनी चाहिए क्योंकि प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "यदि किसानों की जमीन वापस नहीं की जा सकती, तो उन्हें ब्याज सहित उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।" जेडीएस ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे जल्द ही सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

Did You Know?: NICE प्रोजेक्ट का उद्देश्य बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में यातायात के दबाव को कम करना था, लेकिन विवादों के कारण यह लंबे समय से कानूनी लड़ाइयों में फंसा हुआ है।

Frequently Asked Questions

1. 'Nothing NICE' अभियान क्या है?
यह जेडीएस द्वारा NICE प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार और अनुबंध के उल्लंघन के खिलाफ चलाया जा रहा एक विरोध अभियान है।

2. निखिल कुमारस्वामी ने क्या मुख्य मांग रखी है?
उन्होंने किसानों को भूमि वापस करने या मुआवजा देने और प्रोजेक्ट के अधूरा होने तक टोल वसूली रोकने की मांग की है।