पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले हुई हिंसा के बाद दर्ज की गई FIR में एक पत्रकार का नाम शामिल होने पर पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (PUWJ) ने कड़ा विरोध जताया है। यूनियन ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए पुलिस कमिश्नर से नाम हटाने की मांग की है।
- पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (PUWJ) ने ABP Majha के पत्रकार का नाम FIR में शामिल करने का विरोध किया।
- COEP परिसर में NSUI और ABVP के बीच हुई झड़प के बाद मामला दर्ज किया गया था।
- पत्रकार संघ ने पुलिस कमिश्नर से पत्रकार का नाम तुरंत हटाने की मांग की है।
- पत्रकार का दावा है कि वे रिपोर्टिंग के लिए गए थे और उन्हें परिसर में प्रवेश से नहीं रोका गया था।
पुणे में कांग्रेस और NSUI के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) में एक मराठी समाचार चैनल 'ABP Majha' के पत्रकार का नाम शामिल किए जाने पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (PUWJ) ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है।
PUWJ के अध्यक्ष उमेश शेल्के के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार से मुलाकात की। यूनियन ने मांग की है कि FIR से पत्रकार का नाम तुरंत हटाया जाए। विवाद की जड़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे (COEP) परिसर में हुई वह हिंसा है, जो पिछले सप्ताह राहुल गांधी के 'छात्रों की गूँज' कार्यक्रम से ठीक पहले हुई थी।
घटना की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 21 अगस्त की रात का है, जब COEP परिसर में ABVP और NSUI/कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब एक छात्रा का वीडियो सामने आया, जिसमें उसने कॉलेज पर अत्यधिक फीस वसूलने का आरोप लगाया था। बाद में छात्रा ने माफी मांगते हुए कहा कि उसे दबाव में ऐसा बोलने के लिए मजबूर किया गया था। इस घटना के बाद तीन अलग-अलग FIR दर्ज की गईं, जिनमें से एक COEP प्रशासन द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें बिना नाम लिए एक 'ABP Majha पत्रकार' के अनधिकृत प्रवेश का आरोप लगाया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी संस्थानों में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को कानूनी पचड़ों में फंसाना लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक गंभीर खतरा है। यदि पत्रकारों को केवल सूचना एकत्र करने के उद्देश्य से परिसर में जाने पर अपराधी माना जाने लगा, तो इससे भविष्य में मीडिया की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गहरा असर पड़ेगा।
पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान कानूनी सुरक्षा मिलना अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतंत्र पत्रकारिता का अंत होगा।
ABP Majha के पत्रकार मंदार गोंजरी ने स्पष्ट किया कि वे 20 अगस्त को छात्रों से राहुल गांधी के कार्यक्रम के बारे में प्रतिक्रिया लेने के लिए गए थे। उन्होंने कहा, "हमने परिसर में प्रवेश किया और सुरक्षाकर्मियों ने हमें रोका नहीं, बल्कि वाहन पार्क करने के लिए निर्देशित किया। हम केवल रिपोर्टिंग के उद्देश्य से वहां मौजूद थे।"
Frequently Asked Questions
1. PUWJ ने पुलिस से क्या मांग की है?
PUWJ ने मांग की है कि FIR से ABP Majha के पत्रकार का नाम हटाया जाए क्योंकि वे केवल रिपोर्टिंग के लिए वहां गए थे।
2. COEP परिसर में क्या विवाद हुआ था?
COEP परिसर में ABVP और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी, जो एक छात्रा के वीडियो बयान को लेकर शुरू हुई थी।