कर्नाटक में 89 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार घोटाले के आरोपों के बीच कांग्रेस नेता बी नागेंद्र ने डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। यह उनका दूसरा इस्तीफा है जो एक ही घोटाले से जुड़ा है।
- बी नागेंद्र ने 89 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच इस्तीफा दिया।
- यह मामला महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़ा है।
- नागेंद्र ने बीजेपी पर 'दलित विरोधी' मानसिकता का आरोप लगाया।
- डीके शिवकुमार ने नागेंद्र को निर्दोष बताते हुए उनका बचाव किया।
बेंगलुरु में एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, कांग्रेस के प्रमुख एसटी नेता बी नागेंद्र ने कर्नाटक कैबिनेट से अपने इस्तीफे की घोषणा की। नागेंद्र, जो काफी भावुक दिखे और प्रेस वार्ता के दौरान फूट-फूट कर रो पड़े, ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय स्वेच्छा से लिया है। यह घटनाक्रम कर्नाटक की राजनीति में उस समय आया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
यह पूरा विवाद महर्षि वाल्मीकी अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 89 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय हेरफेर से जुड़ा है। इस घोटाले की जड़ें तब गहरी हुईं जब मई 2024 में निगम के लेखा अधिकारी, चंद्रशेखरन पी, ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में फंड के अनधिकृत हस्तांतरण का आरोप लगाया था। जांच में पाया गया कि निगम के बैंक खातों से भारी धनराशि विभिन्न अन्य खातों में स्थानांतरित की गई थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नागेंद्र का इस्तीफा कर्नाटक में सत्ता संघर्ष और जातिगत राजनीति के जटिल मिश्रण को दर्शाता है। एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति (ST) नेता का इस तरह से इस्तीफा देना कांग्रेस के लिए सामाजिक आधार को बनाए रखने की चुनौती पेश कर सकता है, विशेष रूप से जब भाजपा इस मुद्दे को 'एंटी-ट्राइबल' नैरेटिव के साथ जोड़ रही है।
नागेंद्र का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत विफलता नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक की राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोपों और जातिगत पहचान के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक है।
नागेंद्र ने अपने बचाव में भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उन्हें केवल इसलिए निशाना बना रही है क्योंकि वे एक दलित नेता हैं। उन्होंने कहा, "भाजपा का मानस 'मनुस्मृति' थोपने वाला है और उनकी मानसिकता आदिवासी विरोधी है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा ने विधानसभा में इन आरोपों पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है।
गौरतलब है कि नागेंद्र ने 2024 में भी इसी घोटाले के कारण इस्तीफा दिया था, लेकिन अगस्त में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सत्ता संभालने के बाद उन्हें फिर से कैबिनेट में शामिल किया गया था। इस बार उन्होंने 'योजना और सांख्यिकी' का मंत्रालय संभाला था।
भाजपा इस मुद्दे को लेकर राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। भाजपा ने 1 सितंबर से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 200 किलोमीटर की पदयात्रा (पडायत्रा) आयोजित करने की घोषणा की है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी इस यात्रा का उद्घाटन करेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं और भ्रष्टाचार को उजागर करना है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बी नागेंद्र पर मुख्य आरोप क्या हैं?
उत्तर: उन पर महर्षि वाल्मीकी अनुसूचित जनजाति विकास निगम के 89 करोड़ रुपये के फंड में अनियमितता करने का आरोप है।
प्रश्न 2: डीके शिवकुमार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नागेंद्र का बचाव करते हुए उन्हें निर्दोष बताया और कहा कि भाजपा उन्हें अपराधी की तरह पेश कर रही है।