मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने जालना में अपना 11वां अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की निष्क्रियता पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'निर्णायक लड़ाई' करार दिया है।
- मनोज जरांगे-पाटिल ने जालना के अंतरवाली सरती में 11वां अनशन शुरू किया।
- मुख्य मांग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड धारकों को ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करना है।
- जरांगे-पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना की।
- अनशनकारियों ने मांग की है कि सभी मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज पुलिस मामले वापस लिए जाएं।
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे-पाटिल ने शनिवार को जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में अपना 'निर्णायक' आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यह उनका पिछले तीन वर्षों में 11वां अनशन है। जरांगे-पाटिल ने इस बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर मराठा समुदाय की मांगों को अनसुना करने का गंभीर आरोप लगाया है।
जरांगे-पाटिल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो उनके पास मुंबई कूच करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उनका मुख्य उद्देश्य 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड धारकों को ओबीसी (OBC) प्रमाण पत्र दिलाना है। यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब राज्य सरकार ने कुनबी रिकॉर्ड और वंशावली सत्यापन की समय सीमा को बढ़ाकर जून 2027 कर दिया है, जिसे आंदोलनकारी केवल एक टालने की रणनीति मान रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। जरांगे-पाटिल का यह अनशन न केवल सरकारी प्रशासन की कार्यक्षमता को चुनौती दे रहा है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि सरकार जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकालती, तो यह आंदोलन बड़े पैमाने पर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकता है।
"सरकार को केवल जिला कलेक्टरों पर निर्भर रहने के बजाय तहसीलदार और जाति सत्यापन अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए।" - मनोज जरांगे-पाटिल
प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई है। इस पर कटाक्ष करते हुए जरांगे-पाटिल ने पूछा, "क्या सरकार मेरे साथ कुश्ती लड़ने की तैयारी कर रही है?" उन्होंने मराठा समुदाय के युवाओं और परिवारों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए सड़कों पर उतरें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग दशकों पुरानी है। हाल के वर्षों में, मनोज जरांगे-पाटिल के नेतृत्व में यह आंदोलन एक नया मोड़ ले चुका है। कुनबी प्रमाण पत्रों के माध्यम से मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग सबसे प्रमुख संघर्ष का केंद्र बनी हुई है।
Frequently Asked Questions
1. जरांगे-पाटिल की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मुख्य मांग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड धारकों को ओबीसी प्रमाण पत्र प्रदान करना और मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना है।
2. अनशन का स्थान क्या है?
यह अनशन जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में आयोजित किया जा रहा है।